baat sun ai chashm-e-tar kuchh hosh kar | बात सुन ऐ चश्म-ए-तर कुछ होश कर

  - Tahir Hanfi
बातसुनचश्म-ए-तरकुछहोशकर
डूबजाएगायेघरकुछहोशकर
ख़ुद-कुशीहीमसअलेकाहलहैक्या
बामसेवापसउतरकुछहोशकर
दश्तकीजानिबचलातोहैमगर
सख़्तहैयेरहगुज़रकुछहोशकर
अबकियाजज़्बातमेंगरफ़ैसला
रोएगातूउम्रभरकुछहोशकर
मतपटख़ज़िंदाँमेंदीवारोंपेसर
ख़ूँसेहोजाएँगीतरकुछहोशकर
अपनीआज़ादीदेसय्यादको
काटकरख़ुदअपनेपरकुछहोशकर
जिसको'ताहिर'तेरीकुछपरवानहीं
उसकीचौखटपरमरकुछहोशकर
  - Tahir Hanfi
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