ik gham ki kahaanii hai auraq-e-shikasta par | इक ग़म की कहानी है औराक़-ए-शिकस्ता पर

  - Tahir Hanfi
इकग़मकीकहानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
औरदिलकीज़बानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
हालअपनासुनानाहैअशआ'रकीसूरतमें
येउम्रगँवानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
तहरीरपेधब्बोंकीसूरतजोमुनक़्क़शहै
वोआँखोंकापानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
रुकनाभीअगरचाहूँमुझसेरुकाजाए
येकैसीरवानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
'ताहिर'मिरीआँखोंमेंपोशीदारहीहैजो
मूरतवोबनानीहैऔराक़-ए-शिकस्तापर
  - Tahir Hanfi
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