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Rahat Indori
aankh men paani rakho honton pe chingaari rakho
aankh men paani rakho honton pe chingaari rakho | आँख में पानी रखो, होंटों पे चिंगारी रखो
- Rahat Indori
आँख
में
पानी
रखो,
होंटों
पे
चिंगारी
रखो
ज़िंदा
रहना
है
तो
तरकीबें
बहुत
सारी
रखो
- Rahat Indori
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ये
इम्तियाज़
ज़रूरी
है
अब
इबादत
में
वही
दु'आ
जो
नज़र
कर
रही
है
लब
भी
करें
Abhishek shukla
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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माँ
जैसे
देखती
हो
तुम
मगर
मैं
तुम्हारी
आँख
का
तारा
नहीं
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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तुम्हारा
काम
इतना
है
कि
बस
काजल
लगा
लेना
तुम्हारी
आँख
की
ख़ातिर
नज़ारे
मैं
बनाऊँगा
Khalid Nadeem Shani
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नज़ारे
आँख
में
चुभने
लगे
हैं
यहाँ
हम
साथ
आते
थे
तुम्हारे
Nitesh Kushwah
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पुतलियाँ
तक
भी
तो
फिर
जाती
हैं
देखो
दम-ए-नज़अ
वक़्त
पड़ता
है
तो
सब
आँख
चुरा
जाते
हैं
Ameer Minai
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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इक
नज़र
उस
चेहरे
की
देखी
है
जब
से
यार
मुँह
उतरा
हुआ
है
रौशनी
का
Harsh saxena
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कल
रात
मैं
बहुत
ही
अलग
सा
लगा
मुझे
उसकी
नज़र
ने
यूँँ
मेरी
सूरत
खंगाली
दोस्त
Afzal Ali Afzal
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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सब
की
पगड़ी
को
हवाओं
में
उछाला
जाए
सोचता
हूँ
कोई
अख़बार
निकाला
जाए
पी
के
जो
मस्त
हैं
उन
से
तो
कोई
ख़ौफ़
नहीं
पी
के
जो
होश
में
हैं
उन
को
सँभाला
जाए
आसमाँ
ही
नहीं
इक
चाँद
भी
रहता
है
यहाँ
भूल
कर
भी
कभी
पत्थर
न
उछाला
जाए
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Rahat Indori
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अब
तो
हर
हाथ
का
पत्थर
हमें
पहचानता
है
उम्र
गुज़री
है
तेरे
शहर
में
आते
जाते
Rahat Indori
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मैं
वो
दरिया
हूँ
कि
हर
बूँद
भँवर
है
जिस
की
तुमने
अच्छा
ही
किया
मुझ
से
किनारा
कर
के
Rahat Indori
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जितने
अपने
थे
सब
पराए
थे
हम
हवा
को
गले
लगाए
थे
जितनी
क़स
में
थी
सब
थीं
शर्मिंदा
जितने
वादे
थे
सर
झुकाए
थे
जितने
आँसू
थे
सब
थे
बेगाने
जितने
मेहमाँ
थे
बिन
बुलाए
थे
सब
किताबें
पढ़ी
पढ़ाई
थीं
सारे
क़िस्से
सुने
सुनाए
थे
एक
बंजर
ज़मीं
के
सीने
में
मैंने
कुछ
आसमाँ
उगाए
थे
वरना
औक़ात
क्या
थी
सायों
की
धूप
ने
हौसले
बढ़ाए
थे
सिर्फ़
दो
घूँट
प्यास
की
ख़ातिर
उम्र
भर
धूप
में
नहाए
थे
हाशिए
पर
खड़े
हुए
हैं
हम
हम
ने
ख़ुद
हाशिए
बनाए
थे
मैं
अकेला
उदास
बैठा
था
शाम
ने
क़हक़हे
लगाए
थे
है
ग़लत
उस
को
बे-वफ़ा
कहना
हम
कहाँ
के
धुले
धुलाए
थे
आज
काँटों
भरा
मुक़द्दर
है
हम
ने
गुल
भी
बहुत
खिलाए
थे
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Rahat Indori
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किसने
दस्तक
दी
ये
दिल
पर
कौन
है
आप
तो
अंदर
हैं
बाहर
कौन
है
Rahat Indori
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