pahaadon ko bichha dete kahii khaai nahin milti | पहाड़ों को बिछा देते कहीं खाई नहीं मिलती

  - Tafzeel Ahmad
पहाड़ोंकोबिछादेतेकहींखाईनहींमिलती
मगरऊँचेक़दमरखनेकोऊँचाईनहींमिलती
अकेलाछोड़ताकबहैकिसीकोला-शुऊर-ए-तन
किसीतन्हाईमेंभरपूरतन्हाईनहींमिलती
ग़नीमतहैकिहमनेचश्म-ए-हसरतपालरक्खीहै
ज़मानेकोयेहसरतभीमिरेभाईनहींमिलती
फुसून-ए-रेगमेंमौजेंभीहैंदलदलभीहोतेहैं
मगरसहरासमुंदरथेयेसच्चाईनहींमिलती
तिरीख़ालिसकिरनकीआगहैतैफ़-ए-तसव्वुरमें
क़ुज़हबनतीनहींमुझमेंतोबीनाईनहींमिलती
निचोड़ीजाचुकीहैमिट्टीइकहराहोगयापानी
अनासिरमिलभीजातेहैंतोरा'नाईनहींमिलती
ग़ज़लकहकेसुकूँ'तफ़ज़ील'मिलताहैमगरमिट्टी
इसेलावाउगलकरभीशकेबाईनहींमिलती
  - Tafzeel Ahmad
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