lab-e-mantik rahe koi na chashm-lan-taraani ho | लब-ए-मंतिक़ रहे कोई न चश्म-लन-तरानी हो

  - Tafzeel Ahmad
लब-ए-मंतिक़रहेकोईचश्म-लन-तरानीहो
ज़मींफिरसेमुरत्तबहोफ़लकपरनज़र-ए-सानीहो
अभीतकहमनेजोमाँगातिरेशायाँनहींमाँगा
सिखादेहमकोकुनकहनाजोतेरीमेहरबानीहो
ख़स-ए-बे-माजराहैंख़ारबे-बाज़ारहैंतोक्या
नुमू-शहकारहमभीहैंहमारीभीकिसानीहो
मिलेंगेधूपकीमारीचटानोंमेंभीख़्वाब-ए-नम
कोईख़ुश्कीनहींऐसीजहाँतहमेंपानीहो
लहूकोभीतनफ़्फ़ुसहीरवाँरखताहैख़लियोंमें
बहेसहरामेंभीकश्तीअगरज़ोर-ए-दुख़ानीहो
बड़ासुरख़ाबपरनिकलाबदनकाख़ूँ-चकाँरहना
शफ़क़सय्याहकीलाज़िमथीरंगतअर्ग़वानीहो
तख़ातुबकेलिए'तफ़ज़ील'अबजदमेरेहाज़िरहैं
कोईनक़्क़ारा-ख़ानाहोकिबैतबे-ज़बानीहो
  - Tafzeel Ahmad
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