mehwar pe bhi gardish mirii mehwar se alag hous bahar men tairoon jo samundar se alag ho | मेहवर पे भी गर्दिश मिरी मेहवर से अलग हो

  - Tafzeel Ahmad
मेहवरपेभीगर्दिशमिरीमेहवरसेअलगहो
उसबहरमेंतैरूँजोसमुंदरसेअलगहो
अपनाभीफ़लकहोमगरअफ़्लाकसेहटके
होबोझभीसरकातोमिरेसरसेअलगहो
मैंऐसासिताराहूँतिरीकाहकशाँमें
मौजूदहोमंज़रमेंमंज़रसेअलगहो
दीवार-ए-नुमाइशकीख़राशोंकाहूँमैंरंग
हरलम्हावोधागाहैजोचादरसेअलगहो
उसआतिश-ए-अफ़्सूँकोकोईकैसेबुझाए
जिसआगमेंघरजलताहोवोघरसेअलगहो
छतरीरखूँउसअब्र-ए-सियह-गामकीख़ातिर
कूफ़ीभीहोऔरबहत्तरसेअलगहो
रबऔरतमन्ना-ए-दुईवहम-ए-बशरहै
हम-ज़ादतोक्याअक्सभीदावरसेअलगहो
दामनमेंवोदुनियाहैजोदुनियासेजुदाहै
आएवोक़यामतभीजोमहशरसेअलगहो
पारेकीतरहशहरकाबिखराओहै'तफ़ज़ील'
ऐसाकोईबतलाओजोअंदरसेअलगहो
  - Tafzeel Ahmad
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