KHaamosh bhi rah jaa.e aur izhaar bhi kar de | ख़ामोश भी रह जाए और इज़हार भी कर दे

  - Tafzeel Ahmad
ख़ामोशभीरहजाएऔरइज़हारभीकरदे
तस्वीरवोहाज़िक़हैजोबीमारभीकरदे
हमसेतोहोगीकभीइसतरहमोहब्बत
जोहदसेगुज़रनेपेगुनहगारभीकरदे
इसबारभीतावील-ए-शब-ओ-रोज़नईहै
मुमकिनहैवोक़ाइलमुझेइसबारभीकरदे
अफ़्लाक-तलाशीमेंहूँउसबुर्जकीख़ातिर
जोमेरेख़ज़ानेकोफ़लकपारभीकरदे
आहंग-ए-तसव्वुरसेजोलर्ज़िशहैरगोंमें
उसकोमिरेख़ा
मेंकासरोकारभीकरदे
वोबैतजोमसदूदमेंरौज़नकासबबहैं
उनकोगुल-ए-आवेज़ा-ए-दीवारभीकरदे
क़िर्तासपे'तफ़ज़ील'रवाँजूएकली-रंग
शायदमिरेलफ़्ज़ोंकोमज़ेदारभीकरदे
  - Tafzeel Ahmad
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