hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Vish
mujh ko rone ki sahoolat bhi nahin
mujh ko rone ki sahoolat bhi nahin | मुझ को रोने की सहूलत भी नहीं
- Vish
मुझ
को
रोने
की
सहूलत
भी
नहीं
अपने
घर
का
मैं
बड़ा
बेटा
हूॅं
- Vish
Download Sher Image
अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
Send
Download Image
18 Likes
अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
Send
Download Image
47 Likes
उसके
इश्क़
में
बाल
बढ़ाने
वालों
सुन
लो
उसके
घर
वाले
तो
पैसा
देखेंगे
Shaad Imran
Send
Download Image
44 Likes
अच्छे
हो
कर
लौट
गए
सब
घर
लेकिन
मौत
का
चेहरा
याद
रहा
बीमारों
को
Shariq Kaifi
Send
Download Image
44 Likes
जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
Send
Download Image
0 Likes
जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
Send
Download Image
25 Likes
ये
परिंदे
भी
खेतों
के
मज़दूर
हैं
लौट
के
अपने
घर
शाम
तक
जाएँगे
Bashir Badr
Send
Download Image
39 Likes
कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
Send
Download Image
30 Likes
तू
अपने
घर
में
मुहब्बत
की
जीत
पर
ख़ुश
है
अभी
ठहर
के
मेरा
ख़ानदान
बाक़ी
है
Siraj Faisal Khan
Send
Download Image
33 Likes
पास
मैं
जिसके
हूँ
वो
फिर
भी,
अच्छा
लड़का
ढूँढ़
रही
है
उसने
लगा
रक्खा
है
चश्मा,
और
वो
चश्मा
ढूँढ़
रही
है
फ़ोन
किया
मैंने
और
पूछा,
अब
तक
घर
से
क्यूँँ
नहीं
निकली
उस
ने
कहा
मुझ
सेे
मिलने
का,
एक
बहाना
ढूँढ़
रही
है
Read Full
Tanoj Dadhich
Send
Download Image
53 Likes
Read More
किसी
के
जिस्म
का
हो
या
शराब
या
तेरा
नशे
बग़ैर
मेरी
शाम
की
सहर
न
हुई
Vish
Send
Download Image
1 Like
होने
को
तो
ऐसा
भी
हो
सकता
था
वो
चाहता
तो
मेरा
भी
हो
सकता
था
सहरा
में
वो
दरिया
देख
था
कितना
ख़ुश
ये
आँखों
का
धोका
भी
हो
सकता
था
बस
ये
सोच
के
मैं
हुजरे
में
दुबक
गया
बाहर
जान
का
ख़तरा
भी
हो
सकता
था
राजा
की
तलवार
गिराई
जिसने
'विष'
वो
अदना
सा
प्यादा
भी
हो
सकता
था
Read Full
Vish
Download Image
1 Like
जहाँ
में
तू
ही
नहीं
अकेला
है
ग़म
का
मारा
हुआ
मेरी
जाँ
ये
बाग़
वो
है
जहाँ
पे
हर
इक
शजर
का
हर
फल
सड़ा
हुआ
है
Vish
Send
Download Image
1 Like
थोड़ी
बहुत
तो
मैं
ने
भी
दुनिया
ये
देख
ली
बदलेगा
कौन
रंग
कहाँ
जानता
हूँ
मैं
Vish
Send
Download Image
1 Like
चश्म-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
यहाँ
मेरे
लिए
कू-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
ठिकाना
मेरा
बाद
तेरे
भी
मिला
यूँँ
तो
मोहब्बत
का
मज़ा
तेरे
बिन
दिल
किसी
शय
से
भी
न
माना
मेरा
Read Full
Vish
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Aawargi Shayari
Cigarette Shayari
Tohfa Shayari
Mazhab Shayari
Nazar Shayari