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Vish
jahaan men tu hi nahin akela hai gham ka maara hua meri jaañ
jahaan men tu hi nahin akela hai gham ka maara hua meri jaañ | जहाँ में तू ही नहीं अकेला है ग़म का मारा हुआ मेरी जाँ
- Vish
जहाँ
में
तू
ही
नहीं
अकेला
है
ग़म
का
मारा
हुआ
मेरी
जाँ
ये
बाग़
वो
है
जहाँ
पे
हर
इक
शजर
का
हर
फल
सड़ा
हुआ
है
- Vish
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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सब
परिंदों
से
प्यार
लूँगा
मैं
पेड़
का
रूप
धार
लूँगा
मैं
तू
निशाने
पे
आ
भी
जाए
अगर
कौन
सा
तीर
मार
लूँगा
मैं
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Tehzeeb Hafi
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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मिरे
मरने
पे
क्या
होगा
ये
भी
मालूम
है
मुझ
को
सभी
आँसू
बहाएँगे
दो
पल
फिर
भूल
जाएँगे
Vish
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चश्म-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
यहाँ
मेरे
लिए
कू-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
ठिकाना
मेरा
बाद
तेरे
भी
मिला
यूँँ
तो
मोहब्बत
का
मज़ा
तेरे
बिन
दिल
किसी
शय
से
भी
न
माना
मेरा
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Vish
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किसी
के
जिस्म
का
हो
या
शराब
या
तेरा
नशे
बग़ैर
मेरी
शाम
की
सहर
न
हुई
Vish
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होने
को
तो
ऐसा
भी
हो
सकता
था
वो
चाहता
तो
मेरा
भी
हो
सकता
था
सहरा
में
वो
दरिया
देख
था
कितना
ख़ुश
ये
आँखों
का
धोका
भी
हो
सकता
था
बस
ये
सोच
के
मैं
हुजरे
में
दुबक
गया
बाहर
जान
का
ख़तरा
भी
हो
सकता
था
राजा
की
तलवार
गिराई
जिसने
'विष'
वो
अदना
सा
प्यादा
भी
हो
सकता
था
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Vish
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जड़
में
ही
फॅंस
के
रह
गया
वो
तो
जिसको
बनकर
के
फूल
खिलना
था
Vish
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