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Vish
mire marne pe kya hogaa ye bhi maaloom hai mujh ko
mire marne pe kya hogaa ye bhi maaloom hai mujh ko | मिरे मरने पे क्या होगा ये भी मालूम है मुझ को
- Vish
मिरे
मरने
पे
क्या
होगा
ये
भी
मालूम
है
मुझ
को
सभी
आँसू
बहाएँगे
दो
पल
फिर
भूल
जाएँगे
- Vish
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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मुझे
रोना
नहीं
आवाज़
भी
भारी
नहीं
करनी
मोहब्बत
की
कहानी
में
अदाकारी
नहीं
करनी
Afzal Khan
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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ज़िंदगी
इक
फ़िल्म
है
मिलना
बिछड़ना
सीन
हैं
आँख
के
आँसू
तिरे
किरदार
की
तौहीन
हैं
Sandeep Thakur
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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मुझ
को
रोने
की
सहूलत
भी
नहीं
अपने
घर
का
मैं
बड़ा
बेटा
हूॅं
Vish
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थोड़ी
बहुत
तो
मैं
ने
भी
दुनिया
ये
देख
ली
बदलेगा
कौन
रंग
कहाँ
जानता
हूँ
मैं
Vish
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होने
को
तो
ऐसा
भी
हो
सकता
था
वो
चाहता
तो
मेरा
भी
हो
सकता
था
सहरा
में
वो
दरिया
देख
था
कितना
ख़ुश
ये
आँखों
का
धोका
भी
हो
सकता
था
बस
ये
सोच
के
मैं
हुजरे
में
दुबक
गया
बाहर
जान
का
ख़तरा
भी
हो
सकता
था
राजा
की
तलवार
गिराई
जिसने
'विष'
वो
अदना
सा
प्यादा
भी
हो
सकता
था
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Vish
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चश्म-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
यहाँ
मेरे
लिए
कू-ए-जानाॅं
के
सिवा
क्या
है
ठिकाना
मेरा
बाद
तेरे
भी
मिला
यूँँ
तो
मोहब्बत
का
मज़ा
तेरे
बिन
दिल
किसी
शय
से
भी
न
माना
मेरा
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Vish
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जड़
में
ही
फॅंस
के
रह
गया
वो
तो
जिसको
बनकर
के
फूल
खिलना
था
Vish
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