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Vish
hone ko to aisa bhi ho saka tha
hone ko to aisa bhi ho saka tha | होने को तो ऐसा भी हो सकता था
- Vish
होने
को
तो
ऐसा
भी
हो
सकता
था
वो
चाहता
तो
मेरा
भी
हो
सकता
था
सहरा
में
वो
दरिया
देख
था
कितना
ख़ुश
ये
आँखों
का
धोका
भी
हो
सकता
था
बस
ये
सोच
के
मैं
हुजरे
में
दुबक
गया
बाहर
जान
का
ख़तरा
भी
हो
सकता
था
राजा
की
तलवार
गिराई
जिसने
'विष'
वो
अदना
सा
प्यादा
भी
हो
सकता
था
- Vish
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उदासी
इक
समुंदर
है
कि
जिसकी
तह
नहीं
है
मैं
नीचे
और
नीचे
और
नीचे
जा
रहा
हूँ
Charagh Sharma
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उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
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Paplu Lucknawi
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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किसी
ने
कहा
था
टूटी
हुई
नाव
में
चलो
दरिया
के
साथ
आप
की
रंजिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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आँख
आँसू
को
ऐसे
रस्ता
देती
है
जैसे
रेत
गुज़रने
दरिया
देती
है
कोई
भी
उसको
जीत
नहीं
पाया
अब
तक
वैसे
वो
हर
एक
को
मौक़ा
देती
है
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Kafeel Rana
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इशरत-ए-क़तरा
है
दरिया
में
फ़ना
हो
जाना
दर्द
का
हद
से
गुज़रना
है
दवा
हो
जाना
Mirza Ghalib
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चाँद
चेहरा
ज़ुल्फ़
दरिया
बात
ख़ुशबू
दिल
चमन
इक
तुम्हें
दे
कर
ख़ुदा
ने
दे
दिया
क्या
क्या
मुझे
Bashir Badr
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क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
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Waseem Barelvi
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तिरे
एहसास
में
डूबा
हुआ
मैं
कभी
सहरा
कभी
दरिया
हुआ
मैं
Siraj Faisal Khan
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कोई
कहता
था
समुंदर
हूँ
मैं
और
मिरी
जेब
में
क़तरा
भी
नहीं
Kaifi Azmi
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जड़
में
ही
फॅंस
के
रह
गया
वो
तो
जिसको
बनकर
के
फूल
खिलना
था
Vish
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मिरे
मरने
पे
क्या
होगा
ये
भी
मालूम
है
मुझ
को
सभी
आँसू
बहाएँगे
दो
पल
फिर
भूल
जाएँगे
Vish
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मुझ
को
रोने
की
सहूलत
भी
नहीं
अपने
घर
का
मैं
बड़ा
बेटा
हूॅं
Vish
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थोड़ी
बहुत
तो
मैं
ने
भी
दुनिया
ये
देख
ली
बदलेगा
कौन
रंग
कहाँ
जानता
हूँ
मैं
Vish
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जहाँ
में
तू
ही
नहीं
अकेला
है
ग़म
का
मारा
हुआ
मेरी
जाँ
ये
बाग़
वो
है
जहाँ
पे
हर
इक
शजर
का
हर
फल
सड़ा
हुआ
है
Vish
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