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Vish
jad men hi fans ke rah gaya vo to
jad men hi fans ke rah gaya vo to | जड़ में ही फॅंस के रह गया वो तो
- Vish
जड़
में
ही
फॅंस
के
रह
गया
वो
तो
जिसको
बनकर
के
फूल
खिलना
था
- Vish
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महीनों
फूल
भिजवाने
पड़े
थे
वो
पहली
बार
जब
रूठा
था
मुझ
से
Varun Anand
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फूल
कर
ले
निबाह
काँटों
से
आदमी
ही
न
आदमी
से
मिले
Khumar Barabankvi
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कैसी
बिपता
पाल
रखी
है
क़ुर्बत
की
और
दूरी
की
ख़ुशबू
मार
रही
है
मुझ
को
अपनी
ही
कस्तूरी
की
Naeem Sarmad
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तेरा
रुख़सत
होना
अब
भी
बाक़ी
है
तेरी
ख़ुशबू
परछाईं
से
आती
है
Gopesh "Tanha"
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दिल
का
गुलाब
मैं
ने
जिसे
चूम
कर
दिया
उस
ने
मुझे
बहार
से
महरूम
कर
दिया
Anjum Barabankvi
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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वो
सिर्फ़
फूल
नहीं
ख़ुद
में
ही
क्यारी
था
हमारा
शे'र
तुम्हारी
ग़ज़ल
पे
भारी
था
सब
उसके
चाहने
वाले
सलाम
करते
थे
मैं
उस
हसीन
का
सब
सेे
बड़ा
पुजारी
था
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Vishnu virat
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मुझे
तुम
फूल
देते
हो
मेरे
किस
काम
के
हैं
ये
है
सुन्दर
पर
महक
इन
में
तुम्हारी
तो
नहीं
आती
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Firdous khan
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फूल
ही
फूल
याद
आते
हैं
आप
जब
जब
भी
मुस्कुराते
हैं
Sajid Premi
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ये
जो
है
फूल
हथेली
पे
इसे
फूल
न
जान
मेरा
दिल
जिस्म
से
बाहर
भी
तो
हो
सकता
है
Abbas Tabish
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किसी
के
जिस्म
का
हो
या
शराब
या
तेरा
नशे
बग़ैर
मेरी
शाम
की
सहर
न
हुई
Vish
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थोड़ी
बहुत
तो
मैं
ने
भी
दुनिया
ये
देख
ली
बदलेगा
कौन
रंग
कहाँ
जानता
हूँ
मैं
Vish
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मुझ
को
रोने
की
सहूलत
भी
नहीं
अपने
घर
का
मैं
बड़ा
बेटा
हूॅं
Vish
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होने
को
तो
ऐसा
भी
हो
सकता
था
वो
चाहता
तो
मेरा
भी
हो
सकता
था
सहरा
में
वो
दरिया
देख
था
कितना
ख़ुश
ये
आँखों
का
धोका
भी
हो
सकता
था
बस
ये
सोच
के
मैं
हुजरे
में
दुबक
गया
बाहर
जान
का
ख़तरा
भी
हो
सकता
था
राजा
की
तलवार
गिराई
जिसने
'विष'
वो
अदना
सा
प्यादा
भी
हो
सकता
था
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Vish
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जहाँ
में
तू
ही
नहीं
अकेला
है
ग़म
का
मारा
हुआ
मेरी
जाँ
ये
बाग़
वो
है
जहाँ
पे
हर
इक
शजर
का
हर
फल
सड़ा
हुआ
है
Vish
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