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Shikha Pachouly
saare aañsu tujh par zaayaa' kyun kar den
saare aañsu tujh par zaayaa' kyun kar den | सारे आँसू तुझ पर ज़ाया' क्यूँँ कर दें
- Shikha Pachouly
सारे
आँसू
तुझ
पर
ज़ाया'
क्यूँँ
कर
दें
हमनें
तेरे
बाद
भी
दिलबर
करने
हैं
- Shikha Pachouly
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ख़मोशी
तो
यही
बतला
रही
है
उदासी
रास
मुझको
आ
रही
है
मुझे
जिन
ग़लतियों
से
सीखना
था
वही
फिर
ज़िंदगी
दोहरा
रही
है
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Vishal Singh Tabish
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शोर
की
इस
भीड़
में
ख़ामोश
तन्हाई
सी
तुम
ज़िन्दगी
है
धूप
तो
मद-मस्त
पुर्वाई
सी
तुम
चाहे
महफ़िल
में
रहूँ
चाहे
अकेले
में
रहूँ
गूँजती
रहती
हो
मुझ
में
शोख़
शहनाई
सी
तुम
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Kunwar Bechain
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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ख़ुदा
को
मान
कि
तुझ
लब
के
चूमने
के
सिवा
कोई
इलाज
नहीं
आज
की
उदासी
का
Zafar Iqbal
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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लाज़िम
है
अब
कि
आप
ज़ियादा
उदास
हों
इस
शहर
में
बचे
हैं
बहुत
कम
उदास
लोग
Bhaskar Shukla
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कुछ
सुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
गुन
गुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
धड़कने
भी
ज़रा
तो
रक़्स
करें
पास
आओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझपे
हक़
है
तुम्हारा
जाने
जाँ
हक़
जताओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझ
सेे
इस्लाह
लो
रक़ीबों
पर
जी
जलाओ
कि
जी
नहीं
लगता
ख़ुद
को
कितना
मैं
तोड़
सकती
हूँ
आज़माओ
कि
जी
नहीं
लगता
अब
न
तारों
से
रात
मानेगी
चाँद
लाओ
कि
जी
नहीं
लगता
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Shikha Pachouly
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दिल
किसी
नूर
से
मुनव्वर
था
जब
तलक
इश्क़
मेरे
अंदर
था
मौसम-ए-वस्ल
में
ये
मायूसी
यार
इस
सेे
तो
हिज्र
बेहतर
था
रात
कहता
है
दूधिया
नज़्में
चाँद
दिन
में
उदास
शायर
था
दीन
पूछो
तो
हँसने
लगता
था
गाँव
में
मेरे
इक
कलंदर
था
वो
जहाँ
हौसले
ने
दम
तोड़ा
बस
उसी
मोड़
पे
मुक़द्दर
था
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Shikha Pachouly
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यही
हमको
गुमाँ
अक्सर
रहे
हैं
हमारे
नाम
वो
जाँ
कर
रहे
हैं
अभी
है
दौर-ए-आग़ाज़-ए-मोहब्बत
वो
मेरा
दिल
दुखाते
डर
रहे
हैं
वफ़ा
उनकी
तबीयत
में
नहीं
है
वो
कोशिश
तो
यक़ीनन
कर
रहे
हैं
मेरी
रुस्वाई
हो
जाए
न
ज़िंदा
वो
मेरा
नाम
लेकर
मर
रहे
हैं
करेंगे
शा'इरी
भी
अगले
दम
पर
अभी
तो
हम
मोहब्बत
कर
रहे
हैं
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Shikha Pachouly
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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तू
नाहक़
ही
इसे
झुठला
रहा
है
मोहब्बत
पर
कभी
पर्दा
रहा
है
अभी
रिश्ते
में
गुंजाइश
है
बाक़ी
अभी
वो
ग़लतियाँ
गिनवा
रहा
है
जहाँ
देखो
कोई
सूरज
का
टुकड़ा
किसी
बादल
से
धोखे
खा
रहा
था
जो
चाहे
तू
तो
रुक
कुछ
ख़्वाब
बुन
लें
तू
जल्दी
जा
अगर
तू
जा
रहा
है
उसे
अब
रोकना
मुमकिन
नहीं
है
वो
अपने
डर
से
आगे
जा
रहा
है
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Shikha Pachouly
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