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Shikha Pachouly
dil kisi noor se munavvar tha
dil kisi noor se munavvar tha | दिल किसी नूर से मुनव्वर था
- Shikha Pachouly
दिल
किसी
नूर
से
मुनव्वर
था
जब
तलक
इश्क़
मेरे
अंदर
था
मौसम-ए-वस्ल
में
ये
मायूसी
यार
इस
सेे
तो
हिज्र
बेहतर
था
रात
कहता
है
दूधिया
नज़्में
चाँद
दिन
में
उदास
शायर
था
दीन
पूछो
तो
हँसने
लगता
था
गाँव
में
मेरे
इक
कलंदर
था
वो
जहाँ
हौसले
ने
दम
तोड़ा
बस
उसी
मोड़
पे
मुक़द्दर
था
- Shikha Pachouly
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जहाँ
से
लौटना
मुमकिन
नहीं
है
कुछ
ऐसे
मोड़
हैं
उसके
बदन
में
Siddharth Saaz
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शायद
आ
जाए
कभी
देखने
वो
रश्क-ए-मसीह
मैं
किसी
और
से
इस
वास्ते
अच्छा
न
हुआ
Anwar Taban
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इसलिए
ये
महीना
ही
शामिल
नहीं
उम्र
की
जंत्री
में
हमारी
उसने
इक
दिन
कहा
था
कि
शादी
है
इस
फरवरी
में
हमारी
Tehzeeb Hafi
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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यही
सोच
कर
ख़ुद
पे
हम
नाज़
करते
कि
हम
उनकी
पहली
मुहब्बत
रहे
हैं
Harsh saxena
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ग़ुस्से
में
भींच
लेता
है
बाँहों
में
अपनी
वो
क्या
सोचना
है
फिर
उसे
ग़ुस्सा
दिलाइए
Pooja Bhatia
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किस
से
उम्मीद
करें
कोई
इलाज-ए-दिल
की
चारा-गर
भी
तो
बहुत
दर्द
का
मारा
निकला
Lutf Ur Rahman
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मैं
सुन
रहा
हूँ
फ़ोन
पे
ख़ामोशियाँ
तेरी
मैं
जानता
हूँ
आज
से
क्या
क्या
तमाम
है
Aslam Rashid
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ये
ऐसा
है
वो
वैसा
है
इन
सब
सेे
तुमको
मतलब
क्या
या
सब
सेे
मतलब
रखना
है
तो
हम
सेे
मतलब
मत
रक्खो
Nirbhay Nishchhal
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हमने
ही
लौटने
का
इरादा
नहीं
किया
उसने
भी
भूल
जाने
का
वा'दा
नहीं
किया
Parveen Shakir
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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सारे
आँसू
तुझ
पर
ज़ाया'
क्यूँँ
कर
दें
हमनें
तेरे
बाद
भी
दिलबर
करने
हैं
Shikha Pachouly
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तू
नाहक़
ही
इसे
झुठला
रहा
है
मोहब्बत
पर
कभी
पर्दा
रहा
है
अभी
रिश्ते
में
गुंजाइश
है
बाक़ी
अभी
वो
ग़लतियाँ
गिनवा
रहा
है
जहाँ
देखो
कोई
सूरज
का
टुकड़ा
किसी
बादल
से
धोखे
खा
रहा
था
जो
चाहे
तू
तो
रुक
कुछ
ख़्वाब
बुन
लें
तू
जल्दी
जा
अगर
तू
जा
रहा
है
उसे
अब
रोकना
मुमकिन
नहीं
है
वो
अपने
डर
से
आगे
जा
रहा
है
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Shikha Pachouly
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यही
हमको
गुमाँ
अक्सर
रहे
हैं
हमारे
नाम
वो
जाँ
कर
रहे
हैं
अभी
है
दौर-ए-आग़ाज़-ए-मोहब्बत
वो
मेरा
दिल
दुखाते
डर
रहे
हैं
वफ़ा
उनकी
तबीयत
में
नहीं
है
वो
कोशिश
तो
यक़ीनन
कर
रहे
हैं
मेरी
रुस्वाई
हो
जाए
न
ज़िंदा
वो
मेरा
नाम
लेकर
मर
रहे
हैं
करेंगे
शा'इरी
भी
अगले
दम
पर
अभी
तो
हम
मोहब्बत
कर
रहे
हैं
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Shikha Pachouly
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कुछ
सुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
गुन
गुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
धड़कने
भी
ज़रा
तो
रक़्स
करें
पास
आओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझपे
हक़
है
तुम्हारा
जाने
जाँ
हक़
जताओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझ
सेे
इस्लाह
लो
रक़ीबों
पर
जी
जलाओ
कि
जी
नहीं
लगता
ख़ुद
को
कितना
मैं
तोड़
सकती
हूँ
आज़माओ
कि
जी
नहीं
लगता
अब
न
तारों
से
रात
मानेगी
चाँद
लाओ
कि
जी
नहीं
लगता
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Shikha Pachouly
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