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Shikha Pachouly
yahii hamko gumaan akshar rahe hain
yahii hamko gumaan akshar rahe hain | यही हमको गुमाँ अक्सर रहे हैं
- Shikha Pachouly
यही
हमको
गुमाँ
अक्सर
रहे
हैं
हमारे
नाम
वो
जाँ
कर
रहे
हैं
अभी
है
दौर-ए-आग़ाज़-ए-मोहब्बत
वो
मेरा
दिल
दुखाते
डर
रहे
हैं
वफ़ा
उनकी
तबीयत
में
नहीं
है
वो
कोशिश
तो
यक़ीनन
कर
रहे
हैं
मेरी
रुस्वाई
हो
जाए
न
ज़िंदा
वो
मेरा
नाम
लेकर
मर
रहे
हैं
करेंगे
शा'इरी
भी
अगले
दम
पर
अभी
तो
हम
मोहब्बत
कर
रहे
हैं
- Shikha Pachouly
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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मेरा
किरदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
ये
समझदार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
इश्क़
है
वादा-फ़रामोश
नहीं
है
कोई
दिल
तलबगार
मेरी
बात
कहाँ
सुनता
है
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Vishal Singh Tabish
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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किसी
ने
प्यार
जताया
जता
के
छोड़
दिया
हवा
में
मुझको
उठाया
उठा
के
छोड़
दिया
किसे
सिखा
रहे
हो
इश्क़
तुम
नए
लड़के
ये
राग
हमने
मियाँ
गा
बजा
के
छोड़
दिया
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Vishnu virat
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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ये
इश्क़
भी
मुझे
लगता
है
बेटियों
की
तरह
जो
माँगता
है
अमूमन
उसे
नहीं
मिलता
Dipendra Singh 'Raaz'
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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इश्क़
का
था
खेल
केवल
दौड़
का
बन
के
बल्लेबाज़
शामिल
हो
गया
Divy Kamaldhwaj
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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दिल
किसी
नूर
से
मुनव्वर
था
जब
तलक
इश्क़
मेरे
अंदर
था
मौसम-ए-वस्ल
में
ये
मायूसी
यार
इस
सेे
तो
हिज्र
बेहतर
था
रात
कहता
है
दूधिया
नज़्में
चाँद
दिन
में
उदास
शायर
था
दीन
पूछो
तो
हँसने
लगता
था
गाँव
में
मेरे
इक
कलंदर
था
वो
जहाँ
हौसले
ने
दम
तोड़ा
बस
उसी
मोड़
पे
मुक़द्दर
था
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Shikha Pachouly
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तू
नाहक़
ही
इसे
झुठला
रहा
है
मोहब्बत
पर
कभी
पर्दा
रहा
है
अभी
रिश्ते
में
गुंजाइश
है
बाक़ी
अभी
वो
ग़लतियाँ
गिनवा
रहा
है
जहाँ
देखो
कोई
सूरज
का
टुकड़ा
किसी
बादल
से
धोखे
खा
रहा
था
जो
चाहे
तू
तो
रुक
कुछ
ख़्वाब
बुन
लें
तू
जल्दी
जा
अगर
तू
जा
रहा
है
उसे
अब
रोकना
मुमकिन
नहीं
है
वो
अपने
डर
से
आगे
जा
रहा
है
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Shikha Pachouly
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कुछ
सुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
गुन
गुनाओ
कि
जी
नहीं
लगता
धड़कने
भी
ज़रा
तो
रक़्स
करें
पास
आओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझपे
हक़
है
तुम्हारा
जाने
जाँ
हक़
जताओ
कि
जी
नहीं
लगता
मुझ
सेे
इस्लाह
लो
रक़ीबों
पर
जी
जलाओ
कि
जी
नहीं
लगता
ख़ुद
को
कितना
मैं
तोड़
सकती
हूँ
आज़माओ
कि
जी
नहीं
लगता
अब
न
तारों
से
रात
मानेगी
चाँद
लाओ
कि
जी
नहीं
लगता
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Shikha Pachouly
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सारे
आँसू
तुझ
पर
ज़ाया'
क्यूँँ
कर
दें
हमनें
तेरे
बाद
भी
दिलबर
करने
हैं
Shikha Pachouly
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