intiha tak baat le jaata hooñ main | इंतिहा तक बात ले जाता हूँ मैं

  - Shariq Kaifi
इंतिहातकबातलेजाताहूँमैं
अबउसेऐसेहीसमझाताहूँमैं
कुछहवाकुछदिलधड़कनेकीसदा
शोरमेंकुछसुननहींपाताहूँमैं
बिनकहेआऊँगाजबभीआऊँगा
मुंतज़िरआँखोंसेघबराताहूँमैं
यादआतीहैतिरीसंजीदगी
औरफिरहँसताचलाजाताहूँमैं
फ़ासलारखकेभीक्याहासिलहुआ
आजभीउसकाहीकहलाताहूँमैं
छुपरहाहूँआइनेकीआँखसे
थोड़ाथोड़ारोज़धुँदलाताहूँमैं
अपनीसारीशानखोदेताहैज़ख़्म
जबदवाकरतानज़रआताहूँमैं
सचतोयेहैमुस्तरदकरकेउसे
इकतरहसेख़ुदकोझुटलाताहूँमैं
आजउसपरभीभटकनापड़गया
रोज़जिसरस्तेसेघरआताहूँमैं
  - Shariq Kaifi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy