mumkin hi na thii KHud se shanaasaai yahaañ tak | मुमकिन ही न थी ख़ुद से शनासाई यहाँ तक

  - Shariq Kaifi
मुमकिनहीथीख़ुदसेशनासाईयहाँतक
लेआयामुझेमेरातमाशाईयहाँतक
रस्ताहोअगरयादतोघरलौटभीजाऊँ
लाईथीकिसीऔरकीबीनाईयहाँतक
शायदतह-ए-दरियामेंछुपाथाकहींसहरा
मेरीहीनज़रदेखनहींपाईयहाँतक
महफ़िलमेंभीतन्हाईनेपीछानहींछोड़ा
घरमेंमिलामैंतोचलीआईयहाँतक
सहराहैतोसहराकीतरहपेशभीआए
आयाहैइसीशौक़मेंसौदाईयहाँतक
इकखेलथाऔरखेलमेंसोचाभीनहींथा
जुड़जाएगामुझसेवोतमाशाईयहाँतक
येउम्रहैजोउसकीख़ता-वारहै'शारिक़'
रहतीहीनहींबातोंमेंसच्चाईयहाँतक
  - Shariq Kaifi
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