raat be-parda si lagti hai mujhe | रात बे-पर्दा सी लगती है मुझे

  - Shariq Kaifi
रातबे-पर्दासीलगतीहैमुझे
ख़ौफ़नेऐसीनज़रदीहैमुझे
आहइसमासूमकोकैसेबताऊँ
क्यूँँउसेखोनेकीजल्दीहैमुझे
जोशमेंहैंइसक़दरतीमारदार
ठीकहोतेशर्मआतीहैमुझे
इकलतीफ़ाजोसमझमेंभीआए
उसपेहँसनाक्यूँँज़रूरीहैमुझे
मुंतशिरहोनेलगेसारेख़याल
नींदबसआनेहीवालीहैमुझे
अबजुनूँकमहोनेवालाहैमिरा
ख़ैरइतनीतोतसल्लीहैमुझे
लाखमद्धमहोतिरीचाहतकीलौ
रौशनीउतनीहीकाफ़ीहैमुझे
गर्दहैबारूदकीसरमेंतोक्या
मौतइकअफ़्वाहलगतीहैमुझे
  - Shariq Kaifi
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