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Shan Sharma
yahaañ KHat hain likhe rakhe kaii benaam bemanzil
yahaañ KHat hain likhe rakhe kaii benaam bemanzil | यहाँ ख़त हैं लिखे रक्खे कई बेनाम बेमंज़िल
- Shan Sharma
यहाँ
ख़त
हैं
लिखे
रक्खे
कई
बेनाम
बेमंज़िल
मुझे
डर
है
कि
क़ासिद
ख़त
सर-ए-अख़बार
करता
है
- Shan Sharma
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तीर
पर
तीर
लगाओ
तुम्हें
डर
किस
का
है
सीना
किस
का
है
मिरी
जान
जिगर
किस
का
है
Ameer Minai
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हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
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एक
मुद्दत
से
मिरी
माँ
नहीं
सोई
'ताबिश'
मैं
ने
इक
बार
कहा
था
मुझे
डर
लगता
है
Abbas Tabish
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डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
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कुछ
न
था
मेरे
पास
खोने
को
तुम
मिले
हो
तो
डर
गया
हूँ
मैं
Nomaan Shauque
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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तुम्हें
दिल
दे
तो
दे
'ताबाँ'
ये
डर
है
हमेशा
को
तुम्हारा
हो
न
जाए
Anwar Taban
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भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
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रात
भर
आँख
पानी-पानी
थी
अश्क़
थे
इश्क़
की
निशानी
थी
तू
था
यकसर
जहाँ
मुझे
हासिल
यार
दिलकश
बहुत
कहानी
थी
दूर
हैं
हम
तो
पड़
गई
नीली
साथ
थे
शाम
ज़ाफ़रानी
थी
नाम
वैसे
ग़ुलाम
मेरा
था
शाह
की
पर
ग़ुलाम
रानी
थी
ज़ुल्फ़
उसकी
तराश
देता
था
मेरी
ख़ातिर
ये
बाग़वानी
थी
सब
नए
ख़त
जला
दिए
मैंने
बात
उन
में
वही
पुरानी
थी
वस्ल
के
दौर
जो
थी
आँखों
में
'शान'
वो
बूँद
शादमानी
थी
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Shan Sharma
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अव्वल
तो
दिल
तन्हा-तन्हा
जलता
है
दोज़ख
जैसे
फिर
ये
सीना
जलता
है
सीली
तेरी
याद
हमेशा
बच
जाती
मेरा
लेक़िन
कतरा-कतरा
जलता
है
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Shan Sharma
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ढूँढते
हैं
लोग
दिलबर
दूसरा
फिर
तीसरा
मुस्तक़िल
अब
आशिक़ी
की
नौकरी
रहती
नहीं
Shan Sharma
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आँसू
आकर
ग़म
को
ऐसे
धो
जाते
गंगा
माँ
धोती
हैं
जैसे
पापों
को
Shan Sharma
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इसलिए
जीता
हूँ
तुझको
दूर
से
ही
देखकर
है
सुना
तितली
को
छू
लो
तो
हसीं
रहती
नहीं
Shan Sharma
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