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Shan Sharma
isliye jeeta hooñ tujhko door se hi dekhkar
isliye jeeta hooñ tujhko door se hi dekhkar | इसलिए जीता हूँ तुझको दूर से ही देखकर
- Shan Sharma
इसलिए
जीता
हूँ
तुझको
दूर
से
ही
देखकर
है
सुना
तितली
को
छू
लो
तो
हसीं
रहती
नहीं
- Shan Sharma
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तितली
से
दोस्ती
न
गुलाबों
का
शौक़
है
मेरी
तरह
उसे
भी
किताबों
का
शौक़
है
Charagh Sharma
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अब
वो
तितली
है
न
वो
उम्र
तआ'क़ुब
वाली
मैं
न
कहता
था
बहुत
दूर
न
जाना
मिरे
दोस्त
Faisal Ajmi
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दो
नन्हीं
कलियों
ने
रोक
लिया
वरना
तितली
ने
तो
आज
धतूरा
खाना
था
Shruti chhaya
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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बाग़
में
जाने
के
आदाब
हुआ
करते
हैं
किसी
तितली
को
न
फूलों
से
उड़ाया
जाए
Nida Fazli
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क्या
कहानी
कहें
बिछड़ने
की
उम्र
थी
तितलियाँ
पकड़ने
की
Talib Rampuri
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उड़ाने
पर
जो
आ
जाऊँ
उड़ा
दूँ
होश
दुनिया
के
मगर
मैं
फूल
से
तितली
उड़ा
सकता
नहीं
यारों
Divy Kamaldhwaj
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तितलियाँ
यूँँ
ही
नहीं
बैठ
रही
हैं
तुम
पर
बारहा
तुमको
भी
फूलों
में
गिना
जाता
है
Nasir khan 'Nasir'
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किताबों
से
निकल
कर
तितलियाँ
ग़ज़लें
सुनाती
हैं
टिफ़िन
रखती
है
मेरी
माँ
तो
बस्ता
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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मेरे
होंटों
पे
ख़ामुशी
है
बहुत
इन
गुलाबों
पे
तितलियाँ
रख
दे
Shakeel Azmi
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वहाँ
तूने
उठाया
जब
भरोसा
इस
मुहब्बत
से
यहाँ
हर
शे'र
बाग़ी
हो
गया
दीवान
का
मेरे
Shan Sharma
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बाद
शादी
के
मिलने
आए
थे
कह
रहे
हो
चुके
पराए
थे
उनके
कानों
में
थे
वही
झुमके
इश्क़
में
हमने
जो
दिलाए
थे
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Shan Sharma
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बेशर्मी
से
इश्क़
हमारे
सर
लें
हम
या
दुनिया
से
थोड़ा-थोड़ा
डर
लें
हम
फ़ॉलो
करना
मुश्किल
है
इक
दूजे
को
दोनों
अपना
इंस्टा
पब्लिक
कर
लें
हम
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Shan Sharma
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नाम
वैसे
ग़ुलाम
मेरा
था
शाह
की
पर
ग़ुलाम
रानी
थी
Shan Sharma
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आपके
रब्त
पर
ज़ुबाँ
ठहरी
लफ्ज़
महरूम
दास्ताँ
ठहरी
मैं
बयाँ
इश्क़
को
न
कर
पाया
नज़्म
भी
मेरी
बेज़ुबाँ
ठहरी
इक
सितारा
ही
मैंने
चाहा
था
हाथ
में
आ
के
कहकशाँ
ठहरी
इक
ख़ुशी
ही
नहीं
ठहर
पाई
बे-क़रारी
जहाँ-तहाँ
ठहरी
मेरी
आवारगी
को
देखा
जब
फिर
न
कोई
गली
यहाँ
ठहरी
सब्र
का
फल
रहा
न
शीरीं
अब
देर
की
तो
न
गाड़ियाँ
ठहरी
आप
भी
हो
ग़लत
फ़हम
तब
से
तल्ख़ियाँ
जब
से
दरमियाँ
ठहरी
रुक
गई
ज़िन्दगी
जो
बिछड़े
हम
'
शान
'
पर
ये
क़लम
कहाँ
ठहरी
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Shan Sharma
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