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Shan Sharma
raat bhar aankh paani-paani thii
raat bhar aankh paani-paani thii | रात भर आँख पानी-पानी थी
- Shan Sharma
रात
भर
आँख
पानी-पानी
थी
अश्क़
थे
इश्क़
की
निशानी
थी
तू
था
यकसर
जहाँ
मुझे
हासिल
यार
दिलकश
बहुत
कहानी
थी
दूर
हैं
हम
तो
पड़
गई
नीली
साथ
थे
शाम
ज़ाफ़रानी
थी
नाम
वैसे
ग़ुलाम
मेरा
था
शाह
की
पर
ग़ुलाम
रानी
थी
ज़ुल्फ़
उसकी
तराश
देता
था
मेरी
ख़ातिर
ये
बाग़वानी
थी
सब
नए
ख़त
जला
दिए
मैंने
बात
उन
में
वही
पुरानी
थी
वस्ल
के
दौर
जो
थी
आँखों
में
'शान'
वो
बूँद
शादमानी
थी
- Shan Sharma
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किताबें
शौक़
से
पढ़ने
लगी
तुम
मैं
भी
थोड़ा
बहुत
लिखने
लगा
हूँ
Shan Sharma
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ढूँढते
हैं
लोग
दिलबर
दूसरा
फिर
तीसरा
मुस्तक़िल
अब
आशिक़ी
की
नौकरी
रहती
नहीं
Shan Sharma
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किया
था
इश्क़
तूने
यार
सब
सेे
वफ़ा
को
गिनतियों
ने
मार
डाला
Shan Sharma
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ये
ख़ुशी
सिगरटें
समझती
हैं
छोड़ता
सोग
आसमाँ
पर
मैं
Shan Sharma
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उसी
की
दीद
हर
ग़म
की
शिफ़ा
थी
कभी
इक
अप्सरा
दिल
की
दवा
थी
अभी
के
ज़ख़्म
ख़ाली
जेब
के
हैं
मोहब्बत
तो
पुराना
हादसा
थी
मिरे
अश्कों
को
अब
लगने
लगा
है
कि
उल्फ़त
ही
ग़मों
की
वालिदा
थी
लगेंगी
हिज्र
में
बेज़ार
ग़ज़लें
जो
दौर-ए-वस्ल
लगती
ख़ुशनुमा
थी
वो
लड़की
'शान'
अब
दिखती
नहीं
है
तुम्हारे
शे'र
का
जो
क़ाफ़िया
थी
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Shan Sharma
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