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Shan Sharma
awwal to dil tanha-tanha jalta hai
awwal to dil tanha-tanha jalta hai | अव्वल तो दिल तन्हा-तन्हा जलता है
- Shan Sharma
अव्वल
तो
दिल
तन्हा-तन्हा
जलता
है
दोज़ख
जैसे
फिर
ये
सीना
जलता
है
सीली
तेरी
याद
हमेशा
बच
जाती
मेरा
लेक़िन
कतरा-कतरा
जलता
है
- Shan Sharma
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इतनी
सारी
यादों
के
होते
भी
जब
दिल
में
वीरानी
होती
है
तो
हैरानी
होती
है
Afzal Khan
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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तुम्हें
इक
मश्वरा
दूँ
सादगी
से
कह
दो
दिल
की
बात
बहुत
तैयारियाँ
करने
में
गाड़ी
छूट
जाती
है
Zubair Ali Tabish
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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तुम्हारे
ख़त
को
जलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
ये
दिल
बाहर
निकलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
तुम्हारा
फ़ैसला
है
पास
रुकना
या
नहीं
रुकना
मेरी
क़िस्मत
बदलने
में
ज़रा
सा
वक़्त
बाकी
है
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Tanoj Dadhich
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
Shamsul Hasan ShamS
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राएगाँ
थे
या
फिर
अमानत
थे
जो
भी
थे
हम
तिरी
बदौलत
थे
बन
गए
तल्ख़
आजकल
वैसे
हम
सरापा
कभी
मोहब्बत
थे
चाहतें
दिल
की
बेमुरव्वत
थी
दिल
के
सब
फ़ैसले
हिमाक़त
थे
थीं
दरारें
मिरी
हक़ीक़त
में
वहम
हर
चाक
की
मरम्मत
थे
वो
मजाज़ी
सी
इक
हसीना
थी
'शान'
के
शे'र
जिसके
बाबत
थे
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Shan Sharma
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इश्क़
पनपेगा
तो
फिर
अश्कों
की
होंगी
बारिशें
पेड़
लगने
पर
कभी
सूखी
ज़मीं
रहती
नहीं
Shan Sharma
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ढूँढते
हैं
लोग
दिलबर
दूसरा
फिर
तीसरा
मुस्तक़िल
अब
आशिक़ी
की
नौकरी
रहती
नहीं
Shan Sharma
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बनाया
दरमियाँ
रिश्ता
ख़ुदा
ने
हमारी
तल्ख़ियों
ने
मार
डाला
Shan Sharma
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रात
भर
आँख
पानी-पानी
थी
अश्क़
थे
इश्क़
की
निशानी
थी
तू
था
यकसर
जहाँ
मुझे
हासिल
यार
दिलकश
बहुत
कहानी
थी
दूर
हैं
हम
तो
पड़
गई
नीली
साथ
थे
शाम
ज़ाफ़रानी
थी
नाम
वैसे
ग़ुलाम
मेरा
था
शाह
की
पर
ग़ुलाम
रानी
थी
ज़ुल्फ़
उसकी
तराश
देता
था
मेरी
ख़ातिर
ये
बाग़वानी
थी
सब
नए
ख़त
जला
दिए
मैंने
बात
उन
में
वही
पुरानी
थी
वस्ल
के
दौर
जो
थी
आँखों
में
'शान'
वो
बूँद
शादमानी
थी
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Shan Sharma
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