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Shamsul Hasan ShamS
aap chahein to kahiin aur bhi rah sakte hain
aap chahein to kahiin aur bhi rah sakte hain | आप चाहें तो कहीं और भी रह सकते हैं
- Shamsul Hasan ShamS
आप
चाहें
तो
कहीं
और
भी
रह
सकते
हैं
दिल
हमारा
है
तो
मर्ज़ी
भी
हमारी
होगी
- Shamsul Hasan ShamS
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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देखिए
होगा
श्री-कृष्ण
का
दर्शन
क्यूँँ-कर
सीना-ए-तंग
में
दिल
गोपियों
का
है
बेकल
Mohsin Kakorvi
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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बहुत
करने
लगी
हो
ज़िक्र
मेरा
किसी
दिन
इश्क़
कर
बैठोगी
मुझ
सेे
Shamsul Hasan ShamS
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हम
ऐसे
ढूँढते
हैं
तुझको
जैसे
मुसाफ़िर
थक
के
साया
ढूँढता
है
Shamsul Hasan ShamS
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छोटा
सा
घर
बार
बहुत
है
मुझको
तेरा
प्यार
बहुत
है
इतना
तुमको
याद
रहे
बस
दुनिया
दुनियादार
बहुत
है
मत
आने
दो
और
किसी
को
एक
ही
चौकीदार
बहुत
है
रब
ने
हमको
मिलवाया
है
रब
का
इतना
प्यार
बहुत
है
कैसे
मिलने
आओगी
अब
रस्ता
ये
दुश्वार
बहुत
है
मैं
समझा
था
इश्क़
किया
है
तू
तो
साहूकार
बहुत
है
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Shamsul Hasan ShamS
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चलो
माना
कि
तुग़्यानी
नहीं
थी
मगर
सहरा
में
आसानी
नहीं
थी
सुपर्द-ए-ख़ाक
होता
जा
रहा
हूँ
मेरी
कोई
निगहबानी
नहीं
थी
मोहब्बत
मौत
का
है
इक
वसीला
यहाँ
जीने
में
इम्कानी
नहीं
थी
शगुफ़्ता
फूल
कुचले
जा
रहे
थे
कभी
मरने
में
आसानी
नहीं
थी
दिलों
को
तोड़ना
पेशा
था
उसका
उसे
कोई
पशेमानी
नहीं
थी
बिछड़ने
की
वजह
उसने
बताई
मोहब्बत
ये
फ़रावानी
नहीं
थी
दुखाया
दिल
नहीं
हमने
किसी
का
किसी
की
बात
भी
मानी
नहीं
थी
बिछड़ते
वक़्त
मुझको
याद
आया
तेरी
आँखों
में
तुग़्यानी
नहीं
थी
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Shamsul Hasan ShamS
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आ
रही
है
हिज़्र
की
बू
आपकी
परछाईं
से
आपको
तो
वस्ल
की
ख़ुशबू
लगानी
चाहिए
Shamsul Hasan ShamS
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