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Shan Sharma
banaya darmiyaañ rishta KHuda ne
banaya darmiyaañ rishta KHuda ne | बनाया दरमियाँ रिश्ता ख़ुदा ने
- Shan Sharma
बनाया
दरमियाँ
रिश्ता
ख़ुदा
ने
हमारी
तल्ख़ियों
ने
मार
डाला
- Shan Sharma
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अच्छी
बुरी
हर
इक
कमी
के
साथ
हैं
हम
यार
आँखों
की
नमी
के
साथ
हैं
दो
जिस्म
ब्याहे
जा
रहे
हैं
आज
भी
हम
सब
पराए
आदमी
के
साथ
हैं
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Neeraj Neer
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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जो
बच
गए
हैं
चराग़
उनको
बचाये
रक्खो
मैं
चाहता
हूँ
हवा
से
रिश्ता
बनाये
रक्खो
Azm Shakri
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बे-सबब
मरने
से
अच्छा
है
कि
हो
कोई
सबब
दोस्तों
सिगरेट
पियो
मय-ख़्वारियाँ
करते
रहो
Ameer Imam
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अभी
तो
जाग
रहे
हैं
चराग़
राहों
के
अभी
है
दूर
सहर
थोड़ी
दूर
साथ
चलो
Ahmad Faraz
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दिवाली
भी
दिवाली
अब
नहीं
है
तुम्हारे
साथ
हर
दिन
थी
दिवाली
Tanoj Dadhich
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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तू
चले
जा
तुझे
भुला
दूँगा
आज
ये
फ़ैसला
सुना
दूँगा
उम्र
भर
दी
तुझे
हैं
तकलीफ़ें
दूर
हो
जा
तुझे
दु'आ
दूँगा
ज़ख़्म
तुझको
नवाज़
दूँ
भी
गर
पर
न
धोखा
मैं
दिलरुबा
दूँगा
है
मिरा
कौन
एक
तू
ही
है
सब्र
कर
दिल
तिरा
दुखा
दूँगा
डायरी
शा'इरी
से
भर
के
मैं
आग
दिल
की
मिरी
बुझा
दूँगा
छोड़
दहलीज़
आ
गया
बाहर
ज़ौम
था
ये
जहाँ
घुमा
दूँगा
दर्द
देकर
मुझे
अभी
हँस
ले
एक
दिन
ग़म
तुझे
ख़ुदा
दूँगा
सौंप
आऊँ
तुझे
उसे
पहले
नाव
फिर
मैं
मिरी
डुबा
दूँगा
शान
थोड़ा
बचा
के
मैं
मुझ
में
जो
भी
बाक़ी
बचा
लुटा
दूँगा
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Shan Sharma
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किया
था
इश्क़
तूने
यार
सब
सेे
वफ़ा
को
गिनतियों
ने
मार
डाला
Shan Sharma
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लिखी
थी
जो
तुम्हें
बेनाम
सी
वो
चिट्ठियाँ
हैं
कहीं
थोड़ी
शिकायत
है
कहीं
कुछ
अर्ज़ियाँ
हैं
तुम्हारे
बाद
दिल
में
याद
ठहरी
और
घर
में
जले
फ़िल्टर
रखे
हैं
और
थोड़ी
तीलियाँ
हैं
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Shan Sharma
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मुझे
मंज़ूर
है
हर
बात
पर
इक
शर्त
है
मेरी
मुझे
बोसा
तिरा
होना
है
अव्वल
इस
जुदाई
में
Shan Sharma
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अगर
होने
लगे
ख़्वाहिश
नज़र
दैर-ओ-हरम
में
लुबां
मंतर
लिए
फिरते
ये
साहिर
क्या
करेंगे
Shan Sharma
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