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shampa andaliib
vo ab hamse doori banaane lage hain
vo ab hamse doori banaane lage hain | वो अब हम सेे दूरी बनाने लगे हैं
- shampa andaliib
वो
अब
हम
सेे
दूरी
बनाने
लगे
हैं
रक़ीबों
की
महफ़िल
सजाने
लगे
हैं
ये
शिकवे
शिकायत
करें
भी
तो
किस
से
सितम
मेहरबाँ
हम
पे
ढाने
लगे
हैं
- shampa andaliib
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पहले-पहल
तो
लड़
लिए
अल्लाह
से
मगर
अब
पेश
आ
रहे
हैं
बड़ी
आजिज़ी
से
हम
Amaan Pathan
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गाहे
गाहे
बस
अब
यही
हो
क्या
तुम
सेे
मिलकर
बहुत
ख़ुशी
हो
क्या
Jaun Elia
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ये
ज़िंदगी
भी
अजब
कारोबार
है
कि
मुझे
ख़ुशी
है
पाने
की
कोई
न
रंज
खोने
का
Javed Akhtar
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ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
Ashraf Jahangeer
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तेरा
मिलना
ख़ुशी
की
बात
सही
तुझ
से
मिल
कर
उदास
रहता
हूँ
Sahir Ludhianvi
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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ये
तुमने
कैसा
बना
कर
हमें
किया
है
गुम
ख़ुशी
से
झूम
उठेगा
जिसे
मिलेंगे
हम
Swapnil Tiwari
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तिरे
वादे
पर
जिए
हम
तो
ये
जान
झूट
जाना
कि
ख़ुशी
से
मर
न
जाते
अगर
ए'तिबार
होता
Mirza Ghalib
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ख़ुदा
का
शुक्र
अदा
कर
वो
बे-वफ़ा
निकला
ख़ुशी
मना
कि
तिरी
जान
की
बहाली
हुई
Shakeel Jamali
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शबो
रोज़
की
चाकरी
ज़िन्दगी
की
मुयस्सर
हुईं
रोटियाँ
दो
घड़ी
की
नहीं
काम
आएँ
जो
इक
दिन
मशीनें
ज़रूरत
बने
आदमी
आदमी
की
कि
कल
शाम
फ़ुरसत
में
आई
उदासी
बता
दी
मुझे
क़ीमतें
हर
ख़ुशी
की
किया
क्या
अमन
जी
ने
बाइस
बरस
में
कभी
जी
लिया
तो
कभी
ख़ुद-कुशी
की
ग़मों
को
ठिकाने
लगाते
लगाते
घड़ी
आ
गई
आदमी
के
ग़मी
की
ये
सारी
तपस्या
का
कारण
यही
है
मिसालें
बनें
तो
बनें
सादगी
की
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Aman G Mishra
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मुझे
इल्हाम
होता
था
कि
इक
दिन
सहारा
शा'इरी
मेरा
बनेगी
shampa andaliib
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समझदारी
का
होता
है
कभी
ये
काम
मेरे
दोस्त
क़दम
पीछे
हटाने
से
कोई
बुज़दिल
नहीं
होता
shampa andaliib
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ख़त
ही
आया
न
कोई
उस
का
न
दिलबर
आया
देखते
देखते
फिर
माहे
दिसम्बर
आया
shampa andaliib
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भीड़
में
इक
दिन
खो
जाऍंगे
हम
बेगाने
हो
जाऍंगे
और
ज़ियादा
ज़ुल्म
हुआ
तो
सहते
सहते
रो
जाऍंगे
जागते
जागते
देखना
इक
दिन
गहरी
नींद
में
सो
जाऍंगे
वक़्त
तो
वक़्त
है
हम
तुम
इक
दिन
आगे-पीछे
हो
जाऍंगे
तुम
बस
हँसते
रहना
और
हम
इस
के
बदले
रो
जाऍंगे
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shampa andaliib
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मैंने
हारी
है
इश्क़
की
बाज़ी
क्या
मुझे
अब
भी
मौत
आएगी?
shampa andaliib
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