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Swapnil Tiwari
ye tumne kaisa banaa kar ha
ye tumne kaisa banaa kar ha | ये तुमने कैसा बना कर हमें किया है गुम
- Swapnil Tiwari
ये
तुमने
कैसा
बना
कर
हमें
किया
है
गुम
ख़ुशी
से
झूम
उठेगा
जिसे
मिलेंगे
हम
- Swapnil Tiwari
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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जब
भी
कहता
हूँ
कब
मिलेंगे
हम
टाल
देता
है
क्या
पता
कह
कर
Shadab Javed
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रखी
थी
ले
के
कॉपी
हम
ने
उसकी
ख़ुशी
से
झूम
उठा
बस्ता
हमारा
Ankit Maurya
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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कुछ
इशारा
जो
किया
हम
ने
मुलाक़ात
के
वक़्त
टाल
कर
कहने
लगे
दिन
है
अभी
रात
के
वक़्त
Insha Allah Khan
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रक़्स
करना
है
तो
फिर
होश
की
पाज़ेब
उतार
आलम-ए-वज्द
में
ही
बे-ख़बरी
आती
है
Rajesh Reddy
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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तुम्हारी
याद
के
गहरे
भँवर
में
तख़य्युल
रक़्स
करना
चाहता
है
Gaurav Singh
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नींद
से
आ
कर
बैठा
है
ख़्वाब
मिरे
घर
बैठा
है
अक्स
मिरा
आईने
में
ले
कर
पत्थर
बैठा
है
पलकें
झुकी
हैं
सहरा
की
जिस
पे
समुंदर
बैठा
है
एक
बगूला
यादों
का
खा
कर
चक्कर
बैठा
है
उस
की
नींदों
पर
इक
ख़्वाब
तितली
बन
कर
बैठा
है
रात
की
टेबल
बुक
कर
के
चाँद
डिनर
पर
बैठा
है
अँधियारा
ख़ामोशी
की
ओढ़
के
चादर
बैठा
है
'आतिश'
धूप
गई
कब
की
घर
में
क्यूँँकर
बैठा
है
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Swapnil Tiwari
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तुम्हारा
ख़्वाब
भी
आए
तो
नींद
पूरी
हो
मैं
सो
तो
जाऊँगा
नींद
आने
की
दवा
लेकर
Swapnil Tiwari
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किरन
इक
मो'जिज़ा
सा
कर
गई
है
धनक
कमरे
में
मेरे
भर
गई
है
उचक
कर
देखती
थी
नींद
तुम
को
लो
ये
आँखों
से
गिर
कर
मर
गई
है
ख़मोशी
छुप
रही
है
अब
सदास
ये
बच्ची
अजनबी
से
डर
गई
है
खुले
मिलते
हैं
मुझ
को
दर
हमेशा
मिरे
हाथों
में
दस्तक
भर
गई
है
उसे
कुछ
अश्क
लाने
को
कहा
था
कहाँ
जा
कर
उदासी
मर
गई
है
उजालों
में
छुपी
थी
एक
लड़की
फ़लक
का
रंग-रोग़न
कर
गई
है
वो
फिर
उभरेगी
थोड़ी
साँस
भरने
नदी
में
लहर
जो
अंदर
गई
है
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Swapnil Tiwari
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तुम
सेे
इक
दिन
कहीं
मिलेंगे
हम
ख़र्च
ख़ुद
को
तभी
करेंगे
हम
धूप
निकली
है
तेरी
बातों
की
आज
छत
पर
पड़े
रहेंगे
हम
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Swapnil Tiwari
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और
कम
याद
आओगी
अगले
बरस
तुम
अब
के
कम
याद
आई
हो
पिछले
बरस
से
Swapnil Tiwari
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