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Rajesh Reddy
raqs karna hai to phir hosh ki paazeb utaar
raqs karna hai to phir hosh ki paazeb utaar | रक़्स करना है तो फिर होश की पाज़ेब उतार
- Rajesh Reddy
रक़्स
करना
है
तो
फिर
होश
की
पाज़ेब
उतार
आलम-ए-वज्द
में
ही
बे-ख़बरी
आती
है
- Rajesh Reddy
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ये
तुमने
कैसा
बना
कर
हमें
किया
है
गुम
ख़ुशी
से
झूम
उठेगा
जिसे
मिलेंगे
हम
Swapnil Tiwari
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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करे
जो
क़ैद
जुनूँ
को
वो
जाल
मत
देना
हो
जिस
में
होश
उसे
ऐसा
हाल
मत
देना
जो
मुझ
सेे
मिलने
का
तुमको
कभी
ख़याल
आए
तो
इस
ख़याल
को
तुम
कल
पे
टाल
मत
देना
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Kashif Adeeb Makanpuri
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हो
न
हो
एक
ही
तस्वीर
के
दो
पहलू
हैं
रक़्स
करता
हुआ
तू
आग
में
जलता
हुआ
मैं
Shahid Zaki
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रखी
थी
ले
के
कॉपी
हम
ने
उसकी
ख़ुशी
से
झूम
उठा
बस्ता
हमारा
Ankit Maurya
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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ये
किस
ने
फ़ोन
पे
दी
साल-ए-नौ
की
तहनियत
मुझ
को
तमन्ना
रक़्स
करती
है
तख़य्युल
गुनगुनाता
है
Ali Sardar Jafri
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ज़ब्त
करो
गर
ग़म
के
बादल
छाए
हैं,
रक़्स
करो
के
बारिश
आने
वाली
है
Darpan
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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मेरे
दिल
के
किसी
कोने
में
इक
मासूम
सा
बच्चा
बड़ों
की
देख
कर
दुनिया
बड़ा
होने
से
डरता
है
Rajesh Reddy
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घर
से
निकले
थे
हौसला
कर
के
लौट
आए
ख़ुदा
ख़ुदा
कर
के
ज़िंदगी
तो
कभी
नहीं
आई
मौत
आई
ज़रा
ज़रा
करके
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Rajesh Reddy
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आख़िर
तो
डूबना
ही
था
काग़ज़
की
नाव
को
इल्ज़ाम
देते
रहिए
नदी
के
बहाव
को
दिल
के
धुऐं
को
आँखों
में
आने
नहीं
दिया
आसाँ
नहीं
था
साधना
इस
रख-रखाव
को
बन
आई
जाँ
पे
जब
पड़ा
सामान
बाँधना
मंज़िल
समझ
के
बैठ
गए
थे
पड़ाव
को
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Rajesh Reddy
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दोस्तों
का
क्या
है
वो
तो
यूँँ
भी
मिल
जाते
हैं
मुफ़्त
रोज़
इक
सच
बोल
कर
दुश्मन
कमाने
चाहिएँ
Rajesh Reddy
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नई
लाशें
बिछाने
के
लिए
ही
गड़े
मुर्दे
उखाड़े
जा
रहे
हैं
Rajesh Reddy
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