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shampa andaliib
samajhdari ka hota hai kabhi ye kaam mere dost
samajhdari ka hota hai kabhi ye kaam mere dost | समझदारी का होता है कभी ये काम मेरे दोस्त
- shampa andaliib
समझदारी
का
होता
है
कभी
ये
काम
मेरे
दोस्त
क़दम
पीछे
हटाने
से
कोई
बुज़दिल
नहीं
होता
- shampa andaliib
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आए
थे
हँसते
खेलते
मय-ख़ाने
में
'फ़िराक़'
जब
पी
चुके
शराब
तो
संजीदा
हो
गए
Firaq Gorakhpuri
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है
अब
भी
बिस्तर-ए-जाँ
पर
तिरे
बदन
की
शिकन
मैं
ख़ुद
ही
मिटने
लगा
हूँ
उसे
मिटाते
हुए
Azhar Iqbal
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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उस
ने
फेंका
मुझ
पे
पत्थर
और
मैं
पानी
की
तरह
और
ऊँचा
और
ऊँचा
और
ऊँचा
हो
गया
Kunwar Bechain
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रहबर
भी
ये
हमदम
भी
ये
ग़म-ख़्वार
हमारे
उस्ताद
ये
क़ौमों
के
हैं
में'मार
हमारे
Unknown
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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जिस
तरफ़
तू
है
उधर
होंगी
सभी
की
नज़रें
ईद
के
चाँद
का
दीदार
बहाना
ही
सही
Amjad Islam Amjad
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मैं
सात
साल
से
अब
तक
हिसार-ए-इश्क़
में
हूँ
वो
शख़्स
आज
भी
मेरे
दिल-ओ-दिमाग़
में
है
Amaan Haider
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वो
चाहे
मजनूँ
हो,
फ़रहाद
हो
कि
राँझा
हो
हर
एक
शख़्स
मेरा
हम
सबक़
निकलता
है
Munawwar Rana
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आपकी
आँखें
हुक्म
देती
हैं
आप
सीधे
ग़ुलाम
करते
हैं
shampa andaliib
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तुम्हारा
नाम
ले
कर
आ
रही
है
हवा
पैगाम
ले
कर
आ
रही
है
सहेली
की
ख़ुशी
से
लग
रहा
है
कोई
इन'आम
ले
कर
आ
रही
है
मुझे
आते
सभी
ये
सोचते
हैं
ये
फिर
से
काम
ले
कर
आ
रही
है
मुझे
दिन
की
कोई
चिंता
नहीं
है
मुसीबत
शाम
ले
कर
आ
रही
समझना
देर
मंदिर
में
हुई
तो
ये
मीरा
श्याम
ले
कर
आ
रही
है
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shampa andaliib
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कौन
किस
को
वहाँ
समझ
पाया
एक
दूजे
पे
एक
सी
गुज़री
shampa andaliib
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कार-ए-दुनिया
से
थक
गई
जब
मैं
तेरे
दीदार
से
मिला
आराम
shampa andaliib
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इतने
बेरंग
भी
नहीं
हैं
हम
गर
ये
दौर-ए-ख़िज़ाँ
गुज़र
जाए
shampa andaliib
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