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shampa andaliib
log us par bhi haq jataate hain
log us par bhi haq jataate hain | लोग उस पर भी हक़ जताते हैं
- shampa andaliib
लोग
उस
पर
भी
हक़
जताते
हैं
जिस
की
क़ीमत
चुकाई
है
मैं
ने
- shampa andaliib
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ओ
सखी
मन
उसका
तो
तन
भी
उसी
का
हक़
है
उसको
ग़ैर
ये
आँगन
न
चू
में
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Neeraj Neer
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गुजर
चुकी
जुल्मते
शब-ए-हिज्र,
पर
बदन
में
वो
तीरगी
है
मैं
जल
मरुंगा
मगर
चिरागों
के
लो
को
मध्यम
नहीं
करूँगा
यह
अहद
लेकर
ही
तुझ
को
सौंपी
थी
मैंने
कलबौ
नजर
की
सरहद
जो
तेरे
हाथों
से
कत्ल
होगा
मैं
उस
का
मातम
नहीं
करूँगा
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Tehzeeb Hafi
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ये
मैंने
कब
कहा
कि
मेरे
हक़
में
फ़ैसला
करे
अगर
वो
मुझ
से
ख़ुश
नहीं
है
तो
मुझे
जुदा
करे
मैं
उसके
साथ
जिस
तरह
गुज़ारता
हूँ
ज़िंदगी
उसे
तो
चाहिए
कि
मेरा
शुक्रिया
अदा
करे
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Tehzeeb Hafi
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कोई
तो
सूद
चुकाए
कोई
तो
ज़िम्मा
ले
उस
इंक़लाब
का
जो
आज
तक
उधार
सा
है
Kaifi Azmi
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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मेरा
क़ातिल
ही
मेरा
मुंसिफ़
है
क्या
मिरे
हक़
में
फ़ैसला
देगा
Sudarshan Fakir
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दोस्त
अपना
हक़
अदा
करने
लगे
बेवफ़ाई
हमनवा
करने
लगे
मेरे
घर
से
एक
चिंगारी
उठी
पेड़
पत्ते
सब
हवा
करने
लगे
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Santosh S Singh
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कुछ
रिश्तों
में
दिल
को
आज़ादी
नइँ
होती
कुछ
कमरों
में
रौशनदान
नहीं
होता
है
Vikram Gaur Vairagi
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बाज़
बनना
है
तो
फिर
कद
भूल
जा
आँख
में
रख
लक्ष्य
और
हद
भूल
जा
किसलिए
डरता
है
दीवारों
से
तू
आ
समाँँ
को
देख
सरहद
भूल
जा
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Ajeetendra Aazi Tamaam
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मोहब्बत
की
तो
कोई
हद,
कोई
सरहद
नहीं
होती
हमारे
दरमियाँ
ये
फ़ासले,
कैसे
निकल
आए
Khalid Moin
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किसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ख़ुशी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
सभी
को
जानना
है
इस
जहाँ
में
सभी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
ये
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
मगर
मैं
तुझी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
वही
इक
शख़्स
मेरी
सुन
सकेगा
उसी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
याद
में
आँसू
बहा
कर
नमी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
समझ
पाई
नहीं
मैं
राज़-ए-गुलशन
कली
से
बात
करना
चाहती
हूँ
किसी
की
राह
तकते
थक
गई
अब
घड़ी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
अगर
मेरी
सुने
तो
कुछ
घड़ी
मैं
नदी
से
बात
करना
चाहती
हूँ
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shampa andaliib
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रहनुमा
कोई
भी
नहीं
मेरा
अपने
रस्ते
पे
चल
रही
हूँ
मैं
shampa andaliib
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किसी
से
अब
कोई
शिकवा
नहीं
है
हमारा
वक़्त
ही
अच्छा
नहीं
है
फ़लक
पर
धुंध
ही
है
या
हमीं
ने
अभी
तक
ग़ौर
से
देखा
नहीं
है
हमारी
ज़िंदगी
रफ़्तार
में
है
हमारे
पास
कुछ
रुकता
नहीं
है
ये
सूनी
खिड़कियाँ
अब
बोलती
हैं
कोई
परदेस
से
लौटा
नहीं
है
कई
सदमों
से
वाक़िफ़
हो
चुका
है
ग़नीमत
है
कि
दिल
बैठा
नहीं
है
ख़ुशी
की
बात
है
ख़ुश
हैं
हमारे
ख़ुशी
की
बात
पर
रोना
नहीं
है
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shampa andaliib
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इस
तरह
से
न
आज़मा
मुझ
को
मेहरबाँ
है
तो
दे
दु'आ
मुझ
को
एक
मुद्दत
के
बाद
मिल
पाया
एक
अच्छा
सा
रास्ता
मुझ
को
तेरी
नफ़रत
के
साँप
ने
इक
दिन
आँख
खुलते
ही
डस
लिया
मुझ
को
सब
की
नज़रों
में
थी
हवस
क़ायम
कौन
अंदर
से
देखता
मुझ
को
आज
इक
दम
से
बन
गया
शैतान
कल
जो
लगता
था
देवता
मुझ
को
साथ
उस
के
सफ़र
मैं
करती
हूँ
जो
भी
मिलता
है
बा-वफ़ा
मुझ
को
एक
आज़ाद
अंदलीब
हूँ
मैं
ज़िंदा
देखे
तो
कर
रिहा
मुझ
को
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shampa andaliib
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उस
सफ़र
की
तो
ख़बर
सिर्फ़
हमें
है
लोगों
हम
ने
वहशत
में
जहाँ
उम्र
गँवा
दी
अपनी
shampa andaliib
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