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Shadan Ahsan Marehrvi
jo bhi kehne ko meer kahte hain
jo bhi kehne ko meer kahte hain | जो भी कहने को मीर कहते हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
जो
भी
कहने
को
मीर
कहते
हैं
बात
उतनी
वज़ीर
कहते
हैं
मुत्तक़ी
करके
दीन
का
सौदा
ख़ुद
को
अहले
ज़मीर
कहते
हैं
बादशाहों
से
कम
नहीं
रुतबा
आप
ख़ुद
को
फ़क़ीर
कहते
हैं
लोग
आकर
फ़रेब
की
ज़द
में
बुत-परस्तों
को
पीर
कहते
हैं
इश्क़
हो
आरज़ी
तो
मत
करना
बात
इतनी
कबीर
कहते
हैं
इश्क़
की
डोर
से
यूँँ
बाँधा
है
लोग
मुझको
असीर
कहते
हैं
एक
मिसरा
तो
कह
के
दिखलाओ
जिस
तरह
शे'र
मीर
कहते
हैं
पीर
मेरा
अली
है
लासानी
पीर
भी
जिसको
मीर
कहते
हैं
- Shadan Ahsan Marehrvi
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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पहली
ग़लती
पर
मत
छोड़ो
मुझको
तुम
पहली
रोटी
गोल
नहीं
बनती
जानाँ
Tanoj Dadhich
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ग़रीब
लोग
कहाँ
ख़ुद
को
बचा
पाएँगे
वबास
बच
भी
गए
भूख
से
मर
जाएँगे
Astitwa Ankur
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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ये
टूटी
चटाई
ये
मिटटी
का
बर्तन
हिकारत
से
नादान
क्या
देखता
है
गरीबी
मोहम्मद
के
घर
में
पली
है
मेरे
घर
का
सामान
क्या
देखता
है
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Anjuman rahi raza
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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सज़ा
कितनी
बड़ी
है
गाँव
से
बाहर
निकलने
की
मैं
मिट्टी
गूँधता
था
अब
डबलरोटी
बनाता
हूँ
Munawwar Rana
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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हो
गई
अब
विदा
तेरी
चाहत
उसकी
तस्वीर
भी
जला
देना
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मयकदों
में
तो
आम
पीते
हैं
हम
निगाहों
से
जाम
पीते
हैं
तेरी
तस्वीर
सामने
रखकर
करके
तुझ
सेे
कलाम
पीते
हैं
ग़म-ए-फ़ुर्क़त
में
दो
ही
घूँट
फ़क़त
आप
करते
हैं
नाम
पीते
हैं
आओ
पी
लो
के
सुब्ह
सादिक़
है
आओ
बैठो
है
शाम
पीते
हैं
मैं
ज़माने
को
मय-कदे
सा
लगूँ
आओ
इस
तरह
जाम
पीते
हैं
क़ैद
बोतल
में
हैं
अजब
जलवे
आज
बोतल
तमाम
पीते
हैं
घिर
के
आईं
घटाएँ
सावन
की
कीजे
कुछ
इंतिज़ाम
पीते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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रहगुज़र
पर
चले
अदब
की
जो
उनको
रस्ते
से
ही
उतार
दिया
बुग्ज़
से
भरके
अपने
सीनों
को
हाए
तुमने
अदब
को
मार
दिया
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ज़िंदगानी
जब
कहानी
हो
गई
वो
कहानी
ख़ुद
पुरानी
हो
गई
ज़िन्दगी
ने
जो
मुसर्रत
पाई
थी
वो
ख़ुशी
आँखों
का
पानी
हो
गई
जान
दी
दिल
दे
दिया
सौदा
किया
बात
उल्फ़त
की
ज़बानी
हो
गई
बात
उसने
रास्ते
में
जब
न
की
में
ये
समझा
वो
सियानी
हो
गई
दाग़
दामन
पर
हमारे
जो
लगे
क्या
ये
उल्फत
की
निशानी
हो
गई
उनके
आने
से
हुआ
मसरूर
मैं
ज़िन्दगी
की
मेहरबानी
हो
गई
इश्क़
ने
फेरा
तसव्वुर
जब
मेरा
तब
ज़मीं
भी
आसमानी
हो
गई
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Shadan Ahsan Marehrvi
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मैं
जो
वहशत
से
ऊब
जाऊँगा
मौजे
दरया
में
डूब
जाऊँगा
कितनी
गहरी
हैं
कत्थई
आँखें
इन
निगाहों
में
डूब
जाऊँगा
इस
क़दर
चाहेगी
जो
तू
मुझको
तेरी
चाहत
से
ऊब
जाऊँगा
लाख
मुझ
पर
भले
लगे
तोहमत
कू-ए-जानाँ
में
ख़ूब
जाऊँगा
ना
ख़ुदा
को
अगर
ख़ुदा
समझूँ
इस
सेे
अच्छा
मैं
डूब
जाऊँगा
इश्क़
की
मौज
तेज़
है
शादान
मैं
जो
तैरा
तो
डूब
जाऊँगा
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Shadan Ahsan Marehrvi
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