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Shadan Ahsan Marehrvi
zindagaani jab kahaanii ho gaii
zindagaani jab kahaanii ho gaii | ज़िंदगानी जब कहानी हो गई
- Shadan Ahsan Marehrvi
ज़िंदगानी
जब
कहानी
हो
गई
वो
कहानी
ख़ुद
पुरानी
हो
गई
ज़िन्दगी
ने
जो
मुसर्रत
पाई
थी
वो
ख़ुशी
आँखों
का
पानी
हो
गई
जान
दी
दिल
दे
दिया
सौदा
किया
बात
उल्फ़त
की
ज़बानी
हो
गई
बात
उसने
रास्ते
में
जब
न
की
में
ये
समझा
वो
सियानी
हो
गई
दाग़
दामन
पर
हमारे
जो
लगे
क्या
ये
उल्फत
की
निशानी
हो
गई
उनके
आने
से
हुआ
मसरूर
मैं
ज़िन्दगी
की
मेहरबानी
हो
गई
इश्क़
ने
फेरा
तसव्वुर
जब
मेरा
तब
ज़मीं
भी
आसमानी
हो
गई
- Shadan Ahsan Marehrvi
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कुछ
बेटियाँ
बिन
बाप
के
भी
काटती
हैं
ज़िंदगी
कुछ
बेटियों
के
सिर
पे
दोनों
हाथ
माँ
के
होते
हैं
Bhoomi Srivastava
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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जो
गुज़ारी
न
जा
सकी
हम
से
हम
ने
वो
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
Jaun Elia
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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तल्ख़ियाँ
इस
में
बहुत
कुछ
हैं
मज़ा
कुछ
भी
नहीं
ज़िंदगी
दर्द-ए-मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
Kaleem Aajiz
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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शौक़े
आज़ादी-ए-हवस
में
कटी
उम्र
जितनी
मेरी
क़फ़स
में
कटी
Shadan Ahsan Marehrvi
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रहगुज़र
पर
चले
अदब
की
जो
उनको
रस्ते
से
ही
उतार
दिया
बुग्ज़
से
भरके
अपने
सीनों
को
हाए
तुमने
अदब
को
मार
दिया
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जो
भी
कहने
को
मीर
कहते
हैं
बात
उतनी
वज़ीर
कहते
हैं
मुत्तक़ी
करके
दीन
का
सौदा
ख़ुद
को
अहले
ज़मीर
कहते
हैं
बादशाहों
से
कम
नहीं
रुतबा
आप
ख़ुद
को
फ़क़ीर
कहते
हैं
लोग
आकर
फ़रेब
की
ज़द
में
बुत-परस्तों
को
पीर
कहते
हैं
इश्क़
हो
आरज़ी
तो
मत
करना
बात
इतनी
कबीर
कहते
हैं
इश्क़
की
डोर
से
यूँँ
बाँधा
है
लोग
मुझको
असीर
कहते
हैं
एक
मिसरा
तो
कह
के
दिखलाओ
जिस
तरह
शे'र
मीर
कहते
हैं
पीर
मेरा
अली
है
लासानी
पीर
भी
जिसको
मीर
कहते
हैं
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Shadan Ahsan Marehrvi
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जो
मिले
और
किसी
से
जाकर
बे-वफ़ा
तुझको
वबा
लग
जाए
Shadan Ahsan Marehrvi
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तुझ
को
पाने
की
जुस्तुजू
में
फिर
और
इक
साल
राएगाँ
निकला
Shadan Ahsan Marehrvi
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