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RAJAT AWASTHI
roothta kyuuñ meraa hum-safar ab nahin
roothta kyuuñ meraa hum-safar ab nahin | रूठता क्यूँ मेरा हम-सफर अब नहीं
- RAJAT AWASTHI
रूठता
क्यूँ
मेरा
हम-सफर
अब
नहीं
क्या
मनाने
का
मुझ
में
हुनर
अब
नहीं
अपनी
आँखों
से
रुख़सत
तूने
किया
इस
बेघर
को
मिलेगा
वो
घर
अब
नहीं
- RAJAT AWASTHI
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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किताब
फ़िल्म
सफ़र
इश्क़
शा'इरी
औरत
कहाँ
कहाँ
न
गया
ख़ुद
को
ढूँढता
हुआ
मैं
Jawwad Sheikh
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सिर्फ़
तालीम
है
वो
शय
यारों
जिस
सेे
ज़िंदा
चराग़
जलते
हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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बा-हुनर
होके
कुछ
न
कर
पाना
रेज़ा-रेज़ा
बिखर
के
ढेह
जाना
मुझको
बेहद
उदास
करता
है
ख़ास
लोगों
का
आम
रह
जाना
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Vishal Bagh
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किताबें
बंद
करके
जब
मैं
बिस्तर
पर
पहुँचता
हूँ
तुम्हारी
याद
भी
आकर
बगल
में
लेट
जाती
है
Bhaskar Shukla
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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तेरे
ख़त
हम
छिपाते
भी
तो
कैसे
कि
ग़लती
इस
में
तो
मेरी
नहीं
थी
अलग
कमरा
मिला
था
हमको
लेकिन
अलग
पर
कोई
अलमारी
नहीं
थी
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RAJAT AWASTHI
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तेरा
नाम
जब
लिख
दिया
रेत
पर
समुंदर
ने
फिर
कोई
हरकत
न
की
RAJAT AWASTHI
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हर
सुब्ह
उठ
के
इसको
मैं
हूँ
चूमता
चाय
है
जैसे
ये
कोई
सौतन
तेरी
RAJAT AWASTHI
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शिकायत
मुझे
थी
इसी
बात
से
कि
तू
ने
कभी
भी
शिकायत
न
की
यहाँ
मैं
ही
तो
था
रियासत
तेरी
तूने
हम
पे
भी
तो
हुकूमत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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