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RAJAT AWASTHI
tere khat ham chhipaate bhi to kaise
tere khat ham chhipaate bhi to kaise | तेरे ख़त हम छिपाते भी तो कैसे
- RAJAT AWASTHI
तेरे
ख़त
हम
छिपाते
भी
तो
कैसे
कि
ग़लती
इस
में
तो
मेरी
नहीं
थी
अलग
कमरा
मिला
था
हमको
लेकिन
अलग
पर
कोई
अलमारी
नहीं
थी
- RAJAT AWASTHI
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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बच
गया
है
जो
तेरा
थोड़ा
सा
हिस्सा
मुझ
में
अब
तलक
मुझको
किसी
का
नहीं
होने
देता
Khan Janbaz
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गुलाबी
होंट
भी
नज़दीक
थे
पर,
हमारे
होंट
ने
माथा
छुआ
था
हमारी
प्यास
भी
सब
सेे
अलग
थी,
हमारा
ज़ब्त
भी
सब
सेे
जुदा
था
Satya Prakash Soni
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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जानती
हो
कि
क्या
हुआ
है
तुम्हें
इश्क़
का
रोग
लग
गया
है
तुम्हें
तुमको
देखें
तो
देखते
जाएँ
देखने
का
अलग
मज़ा
है
तुम्हें
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Pravin Rai
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जो
तुम्हें
मंज़िल
पे
ले
जाएँगी
वो
राहें
अलग
हैं
मैं
वो
रस्ता
हूँ
कि
जिस
पर
तुम
भटक
कर
आ
गई
हो
Harman Dinesh
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तुमको
देखें
तो
देखते
जाएँ
देखने
का
अलग
मज़ा
है
तुम्हें
Pravin Rai
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मैं
हिंदी
और
उर्दू
को
अलग
कैसे
करूँँ
यारों
अगर
साँसें
हटा
दूँ
तो
बदन
में
कुछ
नहीं
बचता
Umesh Maurya
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हिन्दी
में
और
उर्दू
में
फ़र्क़
है
तो
इतना
वो
ख़्वाब
देखते
हैं
हम
देखते
हैं
सपना
Unknown
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कुछ
फ़र्क़
क्यूँँ
हो
मुझ
में
जो
रौशन
हुए
हैं
आप
जलता
नहीं
है
चाँद
सितारों
को
देखकर
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Tanoj Dadhich
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शाख
से
इक
फूल
ख़ुद
हाथों
में
मेरे
आ
गिरा
जब
कहा
उस
सेे
सजाऊँँगा
तुझे
उन
बालों
में
RAJAT AWASTHI
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थोड़ा
दुखी
जो
कल
भी
था,
थोड़ा
उदास
आज
हूँ
ख़ुश
तो
नहीं
हूँ
मैं
मगर
आदमी
खुशमिजाज
हूँ
RAJAT AWASTHI
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शाख
से
इक
फूल
ख़ुद
हाथों
में
मेरे
आ
गिरा
जब
कहा
उस
सेे
सजाउँगा
तुझे
उन
बालों
में
RAJAT AWASTHI
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इस
क़दर
सादगी
सूरत
पे
बसी
है
उसकी
उसका
आईना
भी
उस
सेे
ही
ख़फ़ा
लगता
है
RAJAT AWASTHI
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शिकायत
मुझे
थी
इसी
बात
से
कि
तू
ने
कभी
भी
शिकायत
न
की
यहाँ
मैं
ही
तो
था
रियासत
तेरी
तूने
हम
पे
भी
तो
हुकूमत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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