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RAJAT AWASTHI
nahin lagta hai man ab naukri men
nahin lagta hai man ab naukri men | नहीं लगता है मन अब नौकरी में
- RAJAT AWASTHI
नहीं
लगता
है
मन
अब
नौकरी
में
मज़ा
आने
लगा
है
शा'इरी
में
कमाएँगे
ग़ज़ल
कह
कर
भी
अब
हम
गुज़ारा
क्यूँ
करें
बस
सैलरी
में
- RAJAT AWASTHI
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मैं
ने
मेहनत
से
हथेली
पे
लकीरें
खींचीं
वो
जिन्हें
कातिब-ए-तक़दीर
नहीं
खींच
सका
Umair Najmi
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पत्थर
पहले
ख़ुद
को
पत्थर
करता
है
उसके
बाद
ही
कुछ
कारीगर
करता
है
Madan Mohan Danish
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बी.ए
भी
पास
हों
मिले
बी-बी
भी
दिल-पसंद
मेहनत
की
है
वो
बात
ये
क़िस्मत
की
बात
है
Akbar Allahabadi
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हमारे
गाँव
में
अब
भी
ये
रस्म
क़ायम
है
बड़ों
के
हाथ
में
बच्चे
कमाई
देते
हैं
Irshad 'Arsh'
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बहुत
संजो
के
रक्खा
है
इन्हें
गुल्लक
में
इस
दिल
के
तुम्हारी
याद
के
सिक्के
मेरी
पहली
कमाई
हैं
Piyush Mishra
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'जौन'
दुनिया
की
चाकरी
कर
के
तूने
दिल
की
वो
नौकरी
क्या
की
Jaun Elia
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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हम
मेहनतकश
इस
दुनिया
से
जब
अपना
हिस्सा
माँगेंगे
इक
बाग़
नहीं,
इक
खेत
नहीं,
हम
सारी
दुनिया
माँगेंगे
Faiz Ahmad Faiz
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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हर
सुब्ह
उठ
के
इसको
मैं
हूँ
चूमता
चाय
है
जैसे
ये
कोई
सौतन
तेरी
RAJAT AWASTHI
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तेरे
ख़त
हम
छिपाते
भी
तो
कैसे
कि
ग़लती
इस
में
तो
मेरी
नहीं
थी
अलग
कमरा
मिला
था
हमको
लेकिन
अलग
पर
कोई
अलमारी
नहीं
थी
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RAJAT AWASTHI
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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शाख
से
इक
फूल
ख़ुद
हाथों
में
मेरे
आ
गिरा
जब
कहा
उस
सेे
सजाऊँँगा
तुझे
उन
बालों
में
RAJAT AWASTHI
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रूठता
क्यूँ
मेरा
हम-सफर
अब
नहीं
क्या
मनाने
का
मुझ
में
हुनर
अब
नहीं
अपनी
आँखों
से
रुख़सत
तूने
किया
इस
बेघर
को
मिलेगा
वो
घर
अब
नहीं
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RAJAT AWASTHI
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