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Irshad 'Arsh'
hamaare gaav men ab bhi ye rasm qaayam hai
hamaare gaav men ab bhi ye rasm qaayam hai | हमारे गाँव में अब भी ये रस्म क़ायम है
- Irshad 'Arsh'
हमारे
गाँव
में
अब
भी
ये
रस्म
क़ायम
है
बड़ों
के
हाथ
में
बच्चे
कमाई
देते
हैं
- Irshad 'Arsh'
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आने
वाले
जाने
वाले
हर
ज़माने
के
लिए
आदमी
मज़दूर
है
राहें
बनाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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मेहनत
से
है
अज़्मत
कि
ज़माने
में
नगीं
को
बे-काविश-ए-सीना
न
कभी
नामवरी
दी
Bahadur Shah Zafar
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हर
चंद
कि
हैं
अदबार
में
हम
कहते
हैं
खुले
बाज़ार
में
हम
हैं
सब
से
बड़े
संसार
में
हम
मज़दूर
हैं
हम
मज़दूर
हैं
हम
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Asrar Ul Haq Majaz
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पत्थर
पहले
ख़ुद
को
पत्थर
करता
है
उसके
बाद
ही
कुछ
कारीगर
करता
है
Madan Mohan Danish
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मज़दूर
भले
सारी
ही
उम्र
करे
मेहनत
बेटी
की
विदाई
लायक़
पैसे
नहीं
होते
Amaan Pathan
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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अपने
हाकिम
की
फ़कीरी
पे
तरस
आता
है
जो
ग़रीबों
से
पसीने
की
कमाई
माँगे
Rahat Indori
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वो
शादी
तो
करेगी
मगर
एक
शर्त
पर
हम
हिज्र
में
रहेंगे
अगर
नौकरी
नहीं
Harsh saxena
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मैं
ने
मेहनत
से
हथेली
पे
लकीरें
खींचीं
वो
जिन्हें
कातिब-ए-तक़दीर
नहीं
खींच
सका
Umair Najmi
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हमें
गुलशन
से
गुल
की
आरज़ू
थी
मुसलसल
खार
मिलते
जा
रहे
हैं
Irshad 'Arsh'
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देखा
है
अभी
तुम
ने
तुम
ने
अभी
जाना
है
लेकिन
ये
ज़माने
का
अंदाज़
पुराना
है
क्या
कार-ए-अज़ीयत
है
करना
उसे
रुख़्सत
भी
आँसू
भी
छुपाने
हैं
हँसकर
भी
दिखाना
है
इस
बज़्म-ए-मोहब्बत
में
कुछ
देर
ज़रा
ठहरो
किस
बात
की
जल्दी
है
आख़िर
कहाँ
जाना
है
कुछ
और
कहा
होता
तो
मान
भी
जाता
दिल
पर
तुम
ने
बनाया
जो
कॉमन
सा
बहाना
है
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Irshad 'Arsh'
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नया
किरदार
कहानी
में
उतर
आया
तो
ख़त्म
देखो
मेरा
क़िरदार
हो
भी
सकता
है
Irshad 'Arsh'
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बला
कि
आफ़तें
सिर
पे
उठा
के
चलते
हैं
हम
अपना
हौसला
ख़ुद
ही
बढ़ा
के
चलते
हैं
Irshad 'Arsh'
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वो
मोहब्बत
में
गिरफ़्तार
हो
भी
सकता
है
आदमी
है
तो
गुनहगार
हो
भी
सकता
है
वक़्त
के
साथ
बदलते
हुऐ
देखा
है
उसे
आज
दुश्मन
है
तो
कल
यार
हो
भी
सकता
है
नया
किरदार
कहानी
में
उतर
आया
तो
ख़त्म
देखो
मेरा
क़िरदार
हो
भी
सकता
है
हाकि
में
वक़्त
की
जो
मैंने
शिकायत
की
है
अब
मुख़ालिफ़
मेरा
अख़बार
हो
भी
सकता
है
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Irshad 'Arsh'
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