yuñ shahar ke bazaar men kya kya nahin milta | यूँँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता

  - Sabihuddin Shaibi
यूँँशहरकेबाज़ारमेंक्याक्यानहींमिलता
परहुस्नमेंसानीकोईतेरानहींनहींमिलता
जोकुछदिल-ए-नाकामनेचाहानहींमिलता
मंज़िलनहींमिलतीकभीरस्तानहींमिलता
लहजानहींमिलताकभीचेहरानहींमिलता
दुनियामेंहमेंएकभीतुमसानहींमिलता
छोड़ाहैजोइकघरकोतोदूजानहींमिलता
अबदिलसातिरेकोईठिकानानहींमिलता
आतीहैख़ुशीगरतोवोमिलतीहैअधूरी
ग़मजबकभीमिलताहैअकेलानहींमिलता
  - Sabihuddin Shaibi
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