sochta hooñ main ki kuchh is tarah rona chahiye | सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए

  - Sabihuddin Shaibi
सोचताहूँमैंकिकुछइसतरहरोनाचाहिए
अपनेअश्कोंसेतिरादामनभिगोनाचाहिए
ज़िंदगीकीराहपरकैसेअकेलेहमचलें
इससफ़रमेंहम-सफ़रकोईतोहोनाचाहिए
दिलबहुतछोटाहैमेराऔरजहाँमेंग़मबहुत
मैंपरेशाँहूँकिसेकैसेसमोनाचाहिए
बच्चारोताहैमगररोताहैवोतक़दीरपर
माँसमझतीहैकिमुन्नेकोखिलौनाचाहिए
अजनबीबिस्तरयेबोलारातकेपिछलेपहर
'सबीह'-ए-बे-वतनअबतुझकोसोनाचाहिए
  - Sabihuddin Shaibi
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