jis ko itnaa chaaha main ne jis ko ghazal men likkha chaand | जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिक्खा चाँद

  - Sabihuddin Shaibi
जिसकोइतनाचाहामैंनेजिसकोग़ज़लमेंलिक्खाचाँद
छोड़गयाहैमुझकोकैसेआजवोमेराअपनाचाँद
अपनेचाँदकीसोचोंमेंगुमबैठाथातन्हाईमें
जानेमेरेदिलकेसूनेआँगनमेंकबनिकलाचाँद
छुपजाएकभीसामनेआएखेलेआँख-मिचोलीक्यूँ
मेरीजानमुझेलगताहैबिल्कुलतेरेजैसाचाँद
दुखहोसुखहोरंजख़ुशीहोमुश्किलहोयाआसानी
हरमौसममेंसाथनिभाएमेरायारपुरानाचाँद
नफ़सा-नफ़सीकाआलमहैसबकोअपनीफ़िक्रपड़ी
अपनीधरतीअपनाअंबरअपनासूरजअपनाचाँद
चेहरोंसेख़ुशियाँओझलहैंऔरग़मोंसेदिलबोझल
अबकेअपनेदेसमेंनिकलाईदपेजानेकैसाचाँद
  - Sabihuddin Shaibi
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