main ne dekha hai kaisa ye sapna naya raat ke is pahar | मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

  - Sabihuddin Shaibi
मैंनेदेखाहैकैसायेसपनानयारातकेइसपहर
मुझसेबिछड़ाहुआकोईअपनामिलारातकेइसपहर
नींदक्यूँउड़गईचैनक्यूँखोगयारातकेइसपहर
येअचानकमिरेसाथक्याहोगयारातकेइसपहर
यूँँलगामुझकोजैसेफ़ज़ाख़ुश्बूओंसेमहकनेलगी
फिरकिसीकीगलीसेचलीहैहवारातकेइसपहर
दिलमेंजागीहैकैसीतमन्नानईख़ुदमैंहैरानहूँ
इकनईआरज़ूनेमुझेछूलियारातकेइसपहर
एकमंज़िलबसीथीनिगाहोंमेंजानेवोक्याहोगई
औरख़ुद-बख़ुदएकगुलशनबसारातकेइसपहर
उसकीबिखरीहुईलटनेउलझाएरक्खामुझेऔरमैं
चाहताथाहटादूँमुमकिनहुआरातकेइसपहर
औरक्याकीजिएगा'सबीह'उसकीअबआपमंज़र-कशी
पलजोआयाऔरकरचलाभीगयारातकेइसपहर
  - Sabihuddin Shaibi
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