musalsal mujh pe ye teri inaayat maar daalegi | मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी

  - Sabihuddin Shaibi
मुसलसलमुझपेयेतेरीइनायतमारडालेगी
कभीफ़ुर्क़तकभीइसदर्जाक़ुर्बतमारडालेगी
ग़रीब-ए-शहरकाक्याइसकोग़ुर्बतमारडालेगी
अमीर-ए-शहरकोदौलतकीचाहतमारडालेगी
सड़कपरपायाजाएगाकिसीदिनमेराभीलाशा
मुझेसचबोलतेरहनेकीआदतमारडालेगी
येतेरीदस्त-गीरीएकदिनलेडूबेगीमुझको
मिरीहरबातपरतेरीहिमायतमारडालेगी
अगरचाहतकीशिद्दतदिन-ब-दिनबढ़तीरहीयूँँही
'सबीह'-ए-नीम-जाँतुझकोमोहब्बतमारडालेगी
  - Sabihuddin Shaibi
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