गुज़रेहैंहमपेऐसेभीलम्हेकभीकभी
दिलरोपड़ाहैसुनकेलतीफ़ेकभीकभी
सहरासेतिश्नगीकासबबपूछतेहोक्या
दरियाभीहमनेदेखेहैंप्यासेकभीकभी
गुम-कर्दाराह-ए-ज़ीस्तसहीइसकेबावजूद
पूछेहैंहमसेख़िज़्रनेरस्तेकभीकभी
ऐना-ख़ुदा-ए-वक़्तनइतनाग़ुरूरकर
डूबेहैंसाहिलोंपेसफ़ीनेकभीकभी
हरदिलकोआपआइना-ख़ानानजानिए
पत्थरसेसख़्तहोतेहैंशीशेकभीकभी
'सुम्बुल'हुआहैयेभीकिग़ज़लोंकेरूपमें
नाज़िलहुएहैंहमपेसहीफ़ेकभीकभी