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Rahat Indori
bahut ghuroor hai dariyaa ko apne hone par
bahut ghuroor hai dariyaa ko apne hone par | बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
- Rahat Indori
बहुत
ग़ुरूर
है
दरिया
को
अपने
होने
पर
जो
मेरी
प्यास
से
उलझे
तो
धज्जियाँ
उड़
जाएँ
- Rahat Indori
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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रात
के
जिस्म
में
जब
पहला
पियाला
उतरा
दूर
दरिया
में
मेरे
चाँद
का
हाला
उतरा
Kumar Vishwas
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हमारा
काम
तो
मौसम
का
ध्यान
करना
है
और
उस
के
बाद
के
सब
काम
शश-जहात
के
हैं
Pallav Mishra
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उम्र-भर
के
सज्दों
से
मिल
नहीं
सकी
जन्नत
ख़ुल्द
से
निकलने
को
इक
गुनाह
काफ़ी
है
Ambreen Haseeb Ambar
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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लब-ए-दरिया
पे
देख
आ
कर
तमाशा
आज
होली
का
भँवर
काले
के
दफ़
बाजे
है
मौज
ऐ
यार
पानी
में
Shah Naseer
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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जो
दुनिया
को
सुनाई
दे
उसे
कहते
हैं
ख़ामोशी
जो
आँखों
में
दिखाई
दे
उसे
तूफ़ान
कहते
हैं
Rahat Indori
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सूरज
से
जंग
जीतने
निकले
थे
बेवक़ूफ़
सारे
सिपाही
मोम
के
थे
घुल
के
आ
गए
Rahat Indori
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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उस
की
याद
आई
है
साँसो
ज़रा
आहिस्ता
चलो
धड़कनों
से
भी
इबादत
में
ख़लल
पड़ता
है
Rahat Indori
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बहुत
दिन
से
तुम्हें
देखा
नहीं
है,
ये
आँखों
के
लिए
अच्छा
नहीं
है
Rahat Indori
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