khatm kar dete hain lijye aaj afsaane ko ham | ख़त्म कर देते हैं लीजे आज अफ़्साने को हम

  - Sabahat Asim
ख़त्मकरदेतेहैंलीजेआजअफ़्सानेकोहम
शम्अ'केपहलूमेंदफ़नातेहैंपरवानेकोहम
येनहींहैदेखकरआएहैंदोज़ख़याबहिश्त
बंदगीकरतेहैंअपनेदिलकेबहलानेकोहम
पत्थरोंमेंजानडालेंगेसरोंकोफोड़कर
अज़्मयेकरकेचलेहैंआजबुत-ख़ानेकोहम
शबहुईतोउसशजरहीकोअलावकरलिया
साएमेंबैठेथेजिसकेदिनमेंसुस्तानेकोहम
बहसकेदौरानख़ुदहममुत्तफ़िक़उससेहुए
ज़ो'ममेंअपनेगएथेउसकेसमझानेकोहम
धूलउड़तीछोड़करचलदेगाआगेकारवाँ
औररहजाएँगे'आसिम'ठोकरेंखानेकोहम
  - Sabahat Asim
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