kuchh ab ki baar to aisa bifar gaya paani | कुछ अब की बार तो ऐसा बिफर गया पानी

  - Sabahat Asim
कुछअबकीबारतोऐसाबिफरगयापानी
बहाकेलेगयाहरशयजिधरगयापानी
येअलमियाभीअजबहैकिदश्तसेदरिया
पलटकेपूछरहाहैकिधरगयापानी
किसीभीनलमेंनहींकोईएकबूँदमगर
हरइकमकानकेकमरोंमेंभरगयापानी
धनककेरंगउभरआएक़तरेक़तरेमें
तुम्हारेजिस्मकोछूकरनिखरगयापानी
हैआमशहरमेंदस्तूरबे-हिजाबीका
हरएकशख़्सकीआँखोंकामरगयापानी
मैंतिश्ना-बख़्तउसेहाथभीलगासका
मिरेक़रीबसेहोकेगुज़रगयापानी
किसीबदनमेंहुनरज़ीस्तकानहीं'आसिम'
हुआभीक्याजोसरोंसेउतरगयापानी
  - Sabahat Asim
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