ai vahshat-e-jaan dard ke shehkaar bahut hain | ऐ वहशत-ए-जाँ दर्द के शहकार बहुत हैं

  - Sabahat Asim
वहशत-ए-जाँदर्दकेशहकारबहुतहैं
ज़िंदाहैंमगरलोगयेबीमारबहुतहैं
नफ़रतमेंनहींऐबमोहब्बतपेहैबंदिश
इसशहरमेंइसतर्ज़केमेआ'रबहुतहैं
येमश्क़-ए-तबस्सुमहैफ़क़तरस्म-ए-ज़माना
शिकवेतोपस-ए-पर्दा-ए-इज़हारबहुतहैं
इकमुझकोतिरादर्दभीमंज़ूरहैजानाँ
ख़ुशियोंकेतिरीवर्नातलबगारबहुतहैं
वीरानेमेंहोसकताहैमहफ़ूज़रहेंहम
इंसानकीनगरीमेंतोखूँ-ख़्वारबहुतहैं
जिस्मोंकीतिजारततोहमेशासेहुईहै
रूहोंकेभीइसदौरमेंबाज़ारबहुतहैं
मासूम-ए-गुनहसिर्फ़गुनाहगारवहींहैं
जिसशहरमेंइंसाफ़केदरबारबहुतहैं
ठहरेहुएआँसूकईजागीहुईरातें
'आसिम'पेतिरेदर्दकेआसारबहुतहैं
  - Sabahat Asim
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