hujoom-e-gham hai qalb gham-zada hai | हुजूम-ए-ग़म है क़ल्ब ग़म-ज़दा है

  - Saba Akbarabadi
हुजूम-ए-ग़महैक़ल्बग़म-ज़दाहै
मिरीमहफ़िलमिराख़लवत-कदाहै
अज़लसेआजतककोईसमझा
हयात-ए-मुख़्तसरक्याशो'बदाहै
बहकनेदेज़रारिंदोंकोसाक़ी
यहीहंगामाजान-ए-मय-कदाहै
कहाँदेखोगेतुमअपनीतजल्ली
जोआईनाहैवोहैरत-ज़दाहै
नज़रक्याजाम-ओ-मीनापरउठाऊँ
निगाह-ए-दोस्तपूरामय-कदाहै
इधरभीरुख़करबारान-ए-रहमत
हमाराआशियाँआतिश-ज़दाहै
मिरेपीनेपेपाबंदीहैजबसे
'सबा'उजड़ाहुआसामय-कदाहै
  - Saba Akbarabadi
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