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Raghav Ramkaran
bechainiyon ka apni sabab jaan leejie
bechainiyon ka apni sabab jaan leejie | बेचैनियों का अपनी सबब जान लीजिए
- Raghav Ramkaran
बेचैनियों
का
अपनी
सबब
जान
लीजिए
डर
क्यूँ
रही
हो?
दिल
का
कहा
मान
लीजिए
- Raghav Ramkaran
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कहीं
से
दुख
तो
कहीं
से
घुटन
उठा
लाए
कहाँ-कहाँ
से
न
दीवानापन
उठा
लाए
अजीब
ख़्वाब
था
देखा
के
दर-ब-दर
हो
कर
हम
अपने
मुल्क
से
अपना
वतन
उठा
लाए
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Farhat Abbas Shah
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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अस्ल
में
पाया
ही
'दानिश'
तब
उसे
जब
उसे
खोने
का
डर
जाता
रहा
Madan Mohan Danish
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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आरज़ू'
जाम
लो
झिजक
कैसी
पी
लो
और
दहशत-ए-गुनाह
गई
Arzoo Lakhnavi
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तुम
पर
इक
दिन
मरते
मरते
मर
जाना
है,
दीवाने
को
कहाँ
ख़बर
है
घर
जाना
है
एक
शब्द
तुमको
अंधेरे
का
ख़ौफ़
दिलाकर,
बाद
में
ख़ुद
भी
जान
बूझकर
डर
जाना
है
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Vishal Singh Tabish
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गुज़ार
देते
हैं
रातें
पहलू
में
उसके
जुगनू
को
भी
दर
का
फ़क़ीर
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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लफ्ज़
तुम्हारे
लब
तक
आना
भूल
गए
क्या
तुम
मेरी
ग़ज़लें
गाना
भूल
गए
अब
तो
पंछी
जंगल-जंगल
दिखते
हैं
लगता
है
वो
गाँव
का
दाना
भूल
गए
शहर
में
जब
से
पढ़ने
आया
हूँ
तब
से
बाबू
जी!
मुझ
पर
झुँझलाना
भूल
गए
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Raghav Ramkaran
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मेरी
आँखों
का
पर्दा
जा
रहा
है
कोई
रस्ता
निकलता
आ
रहा
है
रहूँ
आख़िर
मैं
अब
ख़ामोश
कैसे
मेरे
अंदर
कोई
चिल्ला
रहा
है
ग़मों
का
बोझ
है
या
और
ही
कुछ
तेरा
चेहरा
बदलता
जा
रहा
है
तेरी
बातें,
तेरी
बातों
का
जादू
ये
लड़का
इन
में
फँसता
जा
रहा
है
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Raghav Ramkaran
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ऐसे
कब
तक
उसे
निहारा
जाएगा
यूँँ
ही
क्या
ये
साल
गुज़ारा
जाएगा
रोज़
करोडों
जंगल
मिटते
जाते
हैं
और
कहाँ
तक
पाँव
पसारा
जाएगा
इस
घर
में
जो
बच्चा
रोया
करता
है
वो
बच्चा
किस
रोज़
दुलारा
जाएगा
हाकिम
के
कानों
के
परदे
फट
जाएँ
किस
दिन
इतना
तेज़
पुकारा
जाएगा
पेडों
से
कर
प्यार,
नदी
से
कर
यारी
वरना
तू
बेमौत
ही
मारा
जाएगा
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Raghav Ramkaran
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बर्बादी
की
राह
बताने
वाले
हैं
ये
जो
सारे
लोग
ज़माने
वाले
हैं
हम
पर
क्या
इल्ज़ाम
लगाओगे
लोगों
हम
तो
गंगा
रोज़
नहाने
वाले
हैं
दिल
के
तार
बजाना
हम
सेे
सीखोगी?
हम
चेले
उस्ताद
घराने
वाले
हैं
सुनने
वालों
क़लम
उठाओ
लिख
डालो
अब
हम
अपना
हाल
सुनाने
वाले
हैं
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Raghav Ramkaran
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इक
शख़्स
की
हर
एक
निशानी
समेटकर
हम
सो
गए
थे
आँख
में
पानी
समेटकर
Raghav Ramkaran
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