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Raghav Ramkaran
aise kab tak use nihaara jaayega
aise kab tak use nihaara jaayega | ऐसे कब तक उसे निहारा जाएगा
- Raghav Ramkaran
ऐसे
कब
तक
उसे
निहारा
जाएगा
यूँँ
ही
क्या
ये
साल
गुज़ारा
जाएगा
रोज़
करोडों
जंगल
मिटते
जाते
हैं
और
कहाँ
तक
पाँव
पसारा
जाएगा
इस
घर
में
जो
बच्चा
रोया
करता
है
वो
बच्चा
किस
रोज़
दुलारा
जाएगा
हाकिम
के
कानों
के
परदे
फट
जाएँ
किस
दिन
इतना
तेज़
पुकारा
जाएगा
पेडों
से
कर
प्यार,
नदी
से
कर
यारी
वरना
तू
बेमौत
ही
मारा
जाएगा
- Raghav Ramkaran
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सारी
हिम्मत
टूट
गई,
बच्चों
से
ये
सुनकर
अब
भूखे
पेट
गुज़ारा
करने
की
हिम्मत
है
फूँका
घर,
भूखे
बच्चे,
टूटी
उम्मीदें,
अब
मुझ
में,
रस्सी
को
फंदा
करने
की
हिम्मत
है
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Aman G Mishra
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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कहाँ
रोते
उसे
शादी
के
घर
में
सो
इक
सूनी
सड़क
पर
आ
गए
हम
Shariq Kaifi
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अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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इश्क़
कहता
है
भटकते
रहिए
और
तुम
कहते
हो
घर
जाना
है
Madan Mohan Danish
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रोज़
ढक
लेती
थी
नीला
जिस्म
अपना
शुक्र
है
आ
गई
बाहर
घर
की
बातें
Parul Singh "Noor"
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इन
का
उठना
नहीं
है
हश्र
से
कम
घर
की
दीवार
बाप
का
साया
Unknown
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ज़मीं
पे
घर
बनाया
है
मगर
जन्नत
में
रहते
हैं
हमारी
ख़ुश-नसीबी
है
कि
हम
भारत
में
रहते
हैं
Mehshar Afridi
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बेचैनियों
का
अपनी
सबब
जान
लीजिए
डर
क्यूँ
रही
हो?
दिल
का
कहा
मान
लीजिए
Raghav Ramkaran
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इक
शख़्स
की
हर
एक
निशानी
समेटकर
हम
सो
गए
थे
आँख
में
पानी
समेटकर
Raghav Ramkaran
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मेरी
आँखों
का
पर्दा
जा
रहा
है
कोई
रस्ता
निकलता
आ
रहा
है
रहूँ
आख़िर
मैं
अब
ख़ामोश
कैसे
मेरे
अंदर
कोई
चिल्ला
रहा
है
ग़मों
का
बोझ
है
या
और
ही
कुछ
तेरा
चेहरा
बदलता
जा
रहा
है
तेरी
बातें,
तेरी
बातों
का
जादू
ये
लड़का
इन
में
फँसता
जा
रहा
है
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Raghav Ramkaran
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बर्बादी
की
राह
बताने
वाले
हैं
ये
जो
सारे
लोग
ज़माने
वाले
हैं
हम
पर
क्या
इल्ज़ाम
लगाओगे
लोगों
हम
तो
गंगा
रोज़
नहाने
वाले
हैं
दिल
के
तार
बजाना
हम
सेे
सीखोगी?
हम
चेले
उस्ताद
घराने
वाले
हैं
सुनने
वालों
क़लम
उठाओ
लिख
डालो
अब
हम
अपना
हाल
सुनाने
वाले
हैं
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Raghav Ramkaran
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मैंने
उसकी
बात
वहाँ
तक
मानी
है
मेरी
आँख
में
यार
जहाँ
तक
पानी
है
मेरे
अंदर
जो
एक
लड़का
रहता
है
वो
लड़का
तो
मुझ
सेे
ज़्यादा
ज्ञानी
है
सारे
रस्ते
उसके
घर
ही
जाते
हैं
उस
तक
जाने
में
कितनी
आसानी
है
उसको
माँगा,
चाहा,
पूजा
है
हरपल
बस
इतनी
सी
बात
उसे
समझानी
है
पहली
बार
मुहब्बत
की
तो
ये
जाना
पागल
होने
में
कितनी
आसानी
है
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Raghav Ramkaran
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