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Raghav Ramkaran
barbaa
barbaa | बर्बादी की राह बताने वाले हैं
- Raghav Ramkaran
बर्बादी
की
राह
बताने
वाले
हैं
ये
जो
सारे
लोग
ज़माने
वाले
हैं
हम
पर
क्या
इल्ज़ाम
लगाओगे
लोगों
हम
तो
गंगा
रोज़
नहाने
वाले
हैं
दिल
के
तार
बजाना
हम
सेे
सीखोगी?
हम
चेले
उस्ताद
घराने
वाले
हैं
सुनने
वालों
क़लम
उठाओ
लिख
डालो
अब
हम
अपना
हाल
सुनाने
वाले
हैं
- Raghav Ramkaran
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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हम
लबों
से
कह
न
पाए
उन
से
हाल-ए-दिल
कभी
और
वो
समझे
नहीं
ये
ख़ामुशी
क्या
चीज़
है
Nida Fazli
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काम
अब
कोई
न
आएगा
बस
इक
दिल
के
सिवा
रास्ते
बंद
हैं
सब
कूचा-ए-क़ातिल
के
सिवा
Ali Sardar Jafri
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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हम
मिल
के
आ
गए
मगर
अच्छा
नहीं
लगा
फिर
यूँँ
हुआ
असर
कि
घर
अच्छा
नहीं
लगा
इक
बार
दिल
में
तुझ
सेे
जुदाई
का
डर
बना
फिर
दूसरा
कोई
भी
डर
अच्छा
नहीं
लगा
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Shriyansh Qaabiz
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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दिल
आज
शाम
से
ही
उसे
ढूँडने
लगा
कल
जिस
के
बा'द
कमरे
में
तन्हाई
आई
थी
Ammar Iqbal
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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ऐसे
कब
तक
उसे
निहारा
जाएगा
यूँँ
ही
क्या
ये
साल
गुज़ारा
जाएगा
रोज़
करोडों
जंगल
मिटते
जाते
हैं
और
कहाँ
तक
पाँव
पसारा
जाएगा
इस
घर
में
जो
बच्चा
रोया
करता
है
वो
बच्चा
किस
रोज़
दुलारा
जाएगा
हाकिम
के
कानों
के
परदे
फट
जाएँ
किस
दिन
इतना
तेज़
पुकारा
जाएगा
पेडों
से
कर
प्यार,
नदी
से
कर
यारी
वरना
तू
बेमौत
ही
मारा
जाएगा
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Raghav Ramkaran
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मैंने
उसकी
बात
वहाँ
तक
मानी
है
मेरी
आँख
में
यार
जहाँ
तक
पानी
है
मेरे
अंदर
जो
एक
लड़का
रहता
है
वो
लड़का
तो
मुझ
सेे
ज़्यादा
ज्ञानी
है
सारे
रस्ते
उसके
घर
ही
जाते
हैं
उस
तक
जाने
में
कितनी
आसानी
है
उसको
माँगा,
चाहा,
पूजा
है
हरपल
बस
इतनी
सी
बात
उसे
समझानी
है
पहली
बार
मुहब्बत
की
तो
ये
जाना
पागल
होने
में
कितनी
आसानी
है
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Raghav Ramkaran
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मेरी
आँखों
का
पर्दा
जा
रहा
है
कोई
रस्ता
निकलता
आ
रहा
है
रहूँ
आख़िर
मैं
अब
ख़ामोश
कैसे
मेरे
अंदर
कोई
चिल्ला
रहा
है
ग़मों
का
बोझ
है
या
और
ही
कुछ
तेरा
चेहरा
बदलता
जा
रहा
है
तेरी
बातें,
तेरी
बातों
का
जादू
ये
लड़का
इन
में
फँसता
जा
रहा
है
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Raghav Ramkaran
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लफ्ज़
तुम्हारे
लब
तक
आना
भूल
गए
क्या
तुम
मेरी
ग़ज़लें
गाना
भूल
गए
अब
तो
पंछी
जंगल-जंगल
दिखते
हैं
लगता
है
वो
गाँव
का
दाना
भूल
गए
शहर
में
जब
से
पढ़ने
आया
हूँ
तब
से
बाबू
जी!
मुझ
पर
झुँझलाना
भूल
गए
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Raghav Ramkaran
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इक
शख़्स
की
हर
एक
निशानी
समेटकर
हम
सो
गए
थे
आँख
में
पानी
समेटकर
Raghav Ramkaran
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