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Raghav Ramkaran
lafz tumhaare lab tak aanaa bhool ga.e
lafz tumhaare lab tak aanaa bhool ga.e | लफ्ज़ तुम्हारे लब तक आना भूल गए
- Raghav Ramkaran
लफ्ज़
तुम्हारे
लब
तक
आना
भूल
गए
क्या
तुम
मेरी
ग़ज़लें
गाना
भूल
गए
अब
तो
पंछी
जंगल-जंगल
दिखते
हैं
लगता
है
वो
गाँव
का
दाना
भूल
गए
शहर
में
जब
से
पढ़ने
आया
हूँ
तब
से
बाबू
जी!
मुझ
पर
झुँझलाना
भूल
गए
- Raghav Ramkaran
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बच्चों
के
छोटे
हाथों
को
चाँद
सितारे
छूने
दो
चार
किताबें
पढ़
कर
ये
भी
हम
जैसे
हो
जाएँगे
Nida Fazli
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कई
शे'र
पढ़
कर
है
ये
बात
जानी
कोई
शे'र
उसके
मुक़ाबिल
नहीं
है
Alankrat Srivastava
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काग़ज़
में
दब
के
मर
गए
कीड़े
किताब
के
दीवाना
बे-पढ़े-लिखे
मशहूर
हो
गया
Bashir Badr
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कल
मेरी
एक
प्यारी
सहेली
किताब
में
इक
ख़त
छुपा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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ये
शबनमी
लहजा
है
आहिस्ता
ग़ज़ल
पढ़ना
तितली
की
कहानी
है
फूलों
की
ज़बानी
है
Bashir Badr
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न
तीर्थ
जा
कर
न
धर्म
ग्रंथो
का
सार
पा
कर
सुकूँ
मिला
है
मुझे
तो
बस
तेरा
प्यार
पा
कर
ग़रीब
बच्चे
किताब
पढ़
कर
सँवर
रहे
हैं
अमीर
लड़के
बिगड़
रहे
हैं
दुलार
पा
कर
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Alankrat Srivastava
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हमारा
इल्म
बूढ़ा
हो
रहा
है
किताबें
धूल
खाती
जा
रही
हैं
Kaif Uddin Khan
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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प्रेम
की
गली
में
सब
शराब
लेकर
आए
थे
हम
बहुत
ख़राब
थे
किताब
लेकर
आए
थे
Aman Akshar
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चुपके
चुपके
वो
पढ़
रहा
है
मुझे
धीरे
धीरे
बदल
रहा
हूँ
मैं
Aziz Nabeel
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मैंने
उसकी
बात
वहाँ
तक
मानी
है
मेरी
आँख
में
यार
जहाँ
तक
पानी
है
मेरे
अंदर
जो
एक
लड़का
रहता
है
वो
लड़का
तो
मुझ
सेे
ज़्यादा
ज्ञानी
है
सारे
रस्ते
उसके
घर
ही
जाते
हैं
उस
तक
जाने
में
कितनी
आसानी
है
उसको
माँगा,
चाहा,
पूजा
है
हरपल
बस
इतनी
सी
बात
उसे
समझानी
है
पहली
बार
मुहब्बत
की
तो
ये
जाना
पागल
होने
में
कितनी
आसानी
है
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Raghav Ramkaran
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गुमसुम
माली
देख
रहा
हूँ
आँख
सवाली
देख
रहा
हूँ
बाबू
जी
के
हाथ
भी
देखे
और
कुदाली
देख
रहा
हूँ
पंछी
से
था
प्यार
मुझे
तो
पिंजरा
ख़ाली
देख
रहा
हूँ
डूब
रहा
है
मेरा
सूरज
और
मैं
लाली
देख
रहा
हूँ
तुम
भी
देखो
दुनिया
में
कुछ
मैं
हरियाली
देख
रहा
हूँ
बस्ती
का
अहवाल
न
पूँछो
मन्ज़र
ख़ाली
देख
रहा
हूँ
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Raghav Ramkaran
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बर्बादी
की
राह
बताने
वाले
हैं
ये
जो
सारे
लोग
ज़माने
वाले
हैं
हम
पर
क्या
इल्ज़ाम
लगाओगे
लोगों
हम
तो
गंगा
रोज़
नहाने
वाले
हैं
दिल
के
तार
बजाना
हम
सेे
सीखोगी?
हम
चेले
उस्ताद
घराने
वाले
हैं
सुनने
वालों
क़लम
उठाओ
लिख
डालो
अब
हम
अपना
हाल
सुनाने
वाले
हैं
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Raghav Ramkaran
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मेरी
आँखों
का
पर्दा
जा
रहा
है
कोई
रस्ता
निकलता
आ
रहा
है
रहूँ
आख़िर
मैं
अब
ख़ामोश
कैसे
मेरे
अंदर
कोई
चिल्ला
रहा
है
ग़मों
का
बोझ
है
या
और
ही
कुछ
तेरा
चेहरा
बदलता
जा
रहा
है
तेरी
बातें,
तेरी
बातों
का
जादू
ये
लड़का
इन
में
फँसता
जा
रहा
है
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Raghav Ramkaran
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ऐसे
कब
तक
उसे
निहारा
जाएगा
यूँँ
ही
क्या
ये
साल
गुज़ारा
जाएगा
रोज़
करोडों
जंगल
मिटते
जाते
हैं
और
कहाँ
तक
पाँव
पसारा
जाएगा
इस
घर
में
जो
बच्चा
रोया
करता
है
वो
बच्चा
किस
रोज़
दुलारा
जाएगा
हाकिम
के
कानों
के
परदे
फट
जाएँ
किस
दिन
इतना
तेज़
पुकारा
जाएगा
पेडों
से
कर
प्यार,
नदी
से
कर
यारी
वरना
तू
बेमौत
ही
मारा
जाएगा
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Raghav Ramkaran
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